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चहेते तदर्थ शिक्षकों के लिए नियम ताक पर

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पौड़ी। शिक्षा विभाग के कारनामे भी अजब गजब हैं। विभाग में चहेते शिक्षकों के लिए नियम ताक पर रखकर स्कूलों के प्रांतीयकरण (राजकीयकरण) के दौरान तदर्थ शिक्षकों को नियमित नियुक्ति दे दी गई है। इसके आधार पर अब अन्य तदर्थ शिक्षक भी नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। नियुक्ति को लेकर एक ही विभाग में दोहरे नियमों के चलते विभागीय अधिकारी भी असमंजस में हैं।
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प्रदेश में अशासकीय स्कूलों के प्रांतीयकरण के दौरान नियम यह है कि संविदा एवं तदर्थ शिक्षकों को नियमित नियुक्ति नहीं दी जा सकती, लेकिन रुद्रप्रयाग जनपद के जनता इंटर कालेज तिमली बडमा में दो तदर्थ शिक्षकों सहायक अध्यापक एलटी को नियमित नियुक्ति दे दी गई। इसके आधार पर अब गढ़वाल मंडल के कुछ अन्य जनपदों के स्कूलों के तदर्थ शिक्षक भी नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी तर्ज पर उन्हें भी नियमित किया जाए। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा महावीर सिंह बिष्ट के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उमासैंण के एक तदर्थ शिक्षक का कहना है कि जनता इंटर कालेज तिमली बडमा के आधार पर उन्हें भी नियमित नियुक्ति दी जाए। वहीं दूसरी ओर रुद्रप्रयाग जनपद के तिमली बड़मा के दो तदर्थ प्रवक्ता भी इसी आधार पर नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
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यह है मामला
चहेते शिक्षकों को लाभ देने के लिए प्रांतीयकरण के बिंदु संख्या छह को हटा दिया गया। इसमें कहा गया है कि प्रांतीयकरण (राजकीयकरण) के दौरान तदर्थ शिक्षकों को नियमित न किया जाए। उस बिंदु को हटा दिया गया। इसके आधार पर तदर्थ शिक्षक नियमित नियुक्ति पा गए। इनकी देखादेखी अब अन्य शिक्षक भी नियमित नियुक्ति की मांग के लिए शिक्षा विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
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रुद्रप्रयाग जनपद के तिमली बड़मा के लिए हुए शासनादेश के आधार पर कुछ अन्य स्कूलों के तदर्थ शिक्षक भी नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2017 में कुछ शिक्षकों के लिए यह विशेष जीओ जारी हुआ था। -महावीर सिंह बिष्ट, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा
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