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बूंखाल कालिका मंदिर में नहीं हुई पशुबलि

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पाबौ। बूंखाल कालिंका मेला शांतिपूर्ण संपन्न हो गया है। मेले में इस बार भी पशु बलि नहीं हुई। राठ क्षेत्र की अटूट सांस्कृतिक परंपरा और धरोहर के रूप में मनाए जाने वाले बूंखाल कालिंका मंदिर में देवी दर्शन के लिए ग्रामीण आस्था और विश्वास के साथ पहुंचे। पश्चिमी नयार घाटी में सुबह से ढोल-दमाऊ के स्वर गूंजते रहे। देव डोलियों के साथ कई गांवों के ग्रामीण देवी मंदिर तक पहुंचे और कालिंका की खड्ड में दूध-फूल और नारियल भेंट कर पूजा की।
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ब्लॉक थलीसैण में स्थित बूंखाल कालिंका मेले में पशुबलि की प्रशासन को आशंका थी लेकिन ग्रामीण सात्विक तरीके से ढोल-दमाऊ और देव डोलियों के साथ मंदिर स्थल तक पहुंचे। मंदिर के पुजारी रमेश गोदियाल ने बताया कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कालिंका की खड्ड खोली गई। यहां पूजा-अर्चना के बाद सामूहिक हवन किया गया। इस दौरान क्षेत्र के मरोड़ा, धारकोट, नलाई, चोपड़ा, मलुंड, खंडूली, नौगांव, छोया, गोदा, मिलई समेत अन्य कई गांवों के लोग ढोल-दमाऊ के साथ डोली लेकर मंदिर तक पहुंचे। यहां पूजा और यज्ञ में आहुतियां डालने के बाद देवी से सुख समृद्धि की कामना की गई।
एसएसपी जेआर जोशी की देखरेख में पुलिस ने वाहनों की सघन जांच की। पुलिस की मेला स्थल और ग्रामीण क्षेत्रों पर भी पैनी निगाह रही। ग्रामीण कांति बहुगुणा, कृष्ण बल्लभ शास्त्री, राकेश खंकरियाल, रमेश गोदियाल, भूपेंद्र रावत ने कहा कि कालिंका का अत्यधिक महत्व है। यही वजह है कि दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग बूंखाल कालिंका का आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं।
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इनसेट
बूंखाल में बनेगा कालिंका का भव्य मंदिर
प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं दुग्ध राज्यमंत्री (स्वतंत्र) प्रभार डॉ. धन सिंह रावत ने सुबह-सवेरे मेला स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना की। मंदिर में भंडारा देने के साथ ही उन्होंने कहा कि बूंखाल कालिंका मंदिर का 25 लाख रुपये में भव्य निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा, मंदिर तक सड़क निर्माण के साथ पैठाणी-चौराखाल सड़क को पक्का भी किया जाएगा।
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