कोटद्वार की खोह नदी और ब्लाक यमकेश्वर में रवासन नदी में झींगा प्रजाति की मछली पाई गई है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय पौड़ी के शिक्षक डा. कौशल कुमार ने इस मछली को खोज निकाला है। उन्होंने झींगा मछली पर पीएचडी की उपाधि हासिल की है। झींगा मछली पर यह पहला शोध है। इससे पहले माना जाता था कि गढ़वाल में झींगा मछली नहीं पाई जाती है। इस शोध पर उन्हें यूसीओएसडी (उत्तराखंड काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी) देहरादून से यंग साइंटिस्ट अवार्ड भी मिल चुका है।
एचएनबी परिसर पौड़ी के जंतु विज्ञान विभाग के डा. कौशल कुमार ने बताया कि करीब छह महीने की तलाश के बाद उनकी तलाश कोटद्वार की खोह नदी और ब्लाक यमकेश्वर में रवासन नदी में पूरी हुई। इन दोनों नदियों में झींगा मछली की प्रजाति मिली है। उनके मुताबिक इस झींगा मछली को इस क्षेत्र के ग्रामीण सिर्फ जलीय जंतु ही मानते हैं। पहाड़ी झींगा मछली चपटे पत्थरों के नीचे पानी में रहती है। यह मछली बेहद स्वादिष्ट और प्रोटीन से युक्त है। इसकी डिमांड फाइव स्टार होटलों के साथ विदेशों में भी अधिक है। झींगा मछली का मछली का ग्रामीण आसानी से पालन कर सकते हैं। डा. कौशल ने अपना शोध डा. सीबी कोटनाला और डा. अनीता रावत के निर्देशन में पूरा किया।