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जीबी पंत संस्थान घुड़दौड़ी हो सकता है एनआईटी ठोर

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पौड़ी। जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी में एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड बन सकता है। उच्च न्यायालय की फटकार के बाद सरकार राज्य के इंजीनियरिंग कालेजों में एनआईटी का अक्स खोज रही है। शासन ने घुड़दौड़ी संस्थान की पूरी जानकारी संस्थान प्रशासन से मांगी थी। संस्थान प्रशासन ने रिर्पोट तैयार कर शासन को भेज दी है।
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एनआईटी उत्तराखंड को जनपद पौड़ी के सुमाड़ी में बनाए जाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने वर्ष 2009 में की थी। जिसका अस्थाई परिसर राजकीय पॉलीटेक्निक श्रीनगर में में वर्ष 2010-11 से संचालित किया जाने लगा। इस बीच प्रदेश सरकार ने सुमाड़ी में एनआईटी के स्थाई परिसर निर्माण को लेकर कई विफल कोशिशें की, लेकिन कभी भूमि को अनुपयोगी बता कर तो कभी अन्य कारणों से सरकार एनआईटी के निर्माण को लटकाती रही। एनआईटी संघर्ष समिति, प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले आंदोलन भी हुए, जिन्हें प्रदेश सरकार हमेशा विफल करने में जुटी रही। अब उच्च न्यायालय ने दस वर्षों में भी एनआईटी की स्थापना नहीं होने पर प्रदेश व केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। प्रदेश सरकार अब राज्य के इंजीनियरिंग कालेजों में एनआईटी स्थापना को लेकर कवायद में जुट गई है। शासन ने जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी की संपूर्ण जानकारी संस्थान प्रशासन से मांगी थी। जिस पर संस्थान प्रशासन ने जानकारी शासन को भेज दी है। कुलसचिव डा. एचएस भदौरिया ने बताया कि जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी की स्थापना की घोषणा वर्ष 1989 में हुई। यहां कक्षाओं का संचालन वर्ष 1991-92 से शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि संस्थान के पास भूमि, फैकल्टी, भवन, प्रेक्षागृह, खेल मैदान सहित एनआईटी के मानको का पूरा ढांचा है। डा. भदौरिया ने बताया कि शासन ने संस्थान प्रशासन से संपूर्ण जानकारी मांगी थी, जो शासन को भेज दी गई है।
फैकल्टी की स्थिति
पौड़ी। जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी में फैकल्टी की स्थिति भी ठीक स्थिति में है। संस्थान में शिक्षकों के 144 पद हैं। जिनमें से 100 से अधिक नियमित (रेगुलर) और अन्य अनुबंधित हैं। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में भी अधिकतर नियमित स्टाफ है। संस्थान में हर विभाग का अलग-अलग भवन, प्रशासनिक भवन भी अलग है।
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