पौड़ी। संस्कृति विभाग पौड़ी की ओर से गुरु-शिष्य परंपरा के तहत आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न हो गई है। छह माह की कार्यशाला में प्रशिक्षुओं को लोक वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही उनको लोक वाद्य यंत्र, उसके महत्व, उपयोगिता, वैज्ञानिक व आध्यात्मिक तथ्यों की जानकारी दी गई।
जिला मुख्यालय पौड़ी में प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन पर गुरु (प्रशिक्षक) व प्रसिद्ध हुड़कावादक भक्ति लाल शाह ने बताया कि उत्तराखंड के लोक वाद्य यंत्रों का महत्व जितना आध्यात्मिक है, उससे ज्यादा इनमें वैज्ञानिकता भरी हुई है, लेकिन वर्तमान में अनेक लोक वाद्य यंत्र विलुप्ति के कगार पर हैं, जिन्हें सामूहिक प्रयास से संजोया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं को हुड़का, उसकी उत्पत्ति, बनावट, छपेली व तालों का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में डौंर-थाली की ताल, धुंयाल व अरदास की बारीकियां भी बताई गईं। इस मौके पर कार्यशाला निरीक्षक व गायक अनिल बिष्ट, संगतकर्ता तपेश्वर प्रसाद, भरत सिंह रावत, बृजेंद्र, जगमोहन, करन, रोहित, रितेश, चंद्रमोहन, वीरेंद्र, ध्रुव प्रकाश, मनोज कुमार, अक्षय, सतीश चंद्र व धर्मेंद्र आदि मौजूद थे।