पाबौ।
जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर गांव पुसोली के युवा सुशांत पंत ने जयपुर से बीटेक करने के बाद मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार की तरह अपनाया है। सुशांत और उसकी मां सरिता पंत मिलकर मशरूम उगाकर क्षेत्र में युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा के बावजूद पहाड़ के युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। युवाओं के लिए एकेश्वर ब्लॉक के पुसोली गांव के मां-बेटा मिसाल बने हुए हैं। ये मां-बेटा मशरूम की खेती से 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक कमा रहे हैं। सुशांत के पिता दिल्ली में सरकारी नौकरी में हैं। सुशांत ने जयपुर से बीटेक के बाद खुद का कारोबार करने का निर्णय लिया। उन्होंने मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देहरादून से लिया और कारोबार में जुट गए। पहले घर में ही कमरे में छोटे स्तर पर 10 किलो मशरूम उगाया। इसमें मात्र 10 हजार रुपये का खर्च आया। वह प्रतिदिन करीब सात किलो मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। यही नहीं करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित पाबौ बाजार में ही उनका इतना मशरूम बिक जाता है।
कैसे उगाते हैं मशरूम
सुशांत ने बताया कि मशरूम उगाने के लिए गेहूं का भूसा धान की पुआल, मक्की के सूखे पत्ते तथा अन्य कृषि उपज के अवशेष चाहिए। इन्हें आपस में मिलाकर पानी डाला जाता है। प्लास्टिक की थैलियों में भरकर इन्हें बार-बार पानी से सींचा जाता है। इसके लिए बंद कमरे वऔर पर्याप्त नमी का होना जरूरी है।