फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'नीचे उफनती नदी, ऊपर से पत्थर गिरने का डर'

Fri, 21 Jun 2013 05:14 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगोत्री से लौटते हुए रास्ते में भूस्खलन से मार्ग बंद हो गया। भूखे प्यासे चार दिन बस में गुजारे।
विज्ञापन


संचार सेवाएं ठप होने से परिजनों से बात करने को तड़प गए। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली, दून पहुंचे तो लगा नया जीवन मिल गया।

यह कहना है कि हरियाणा के जिला कैथल, फरल गांव निवासी जयपाल सिंह का।

'उत्तराखंड में कहर' अपडेट के लिए क्लिक करें

हजारों वाहन फंसे रहे
जयपाल परिजनों के साथ बृहस्पतिवार शाम दून रेलवे स्टेशन पहुंचे। वे बताते हैं कि नौ जून को यात्रा के लिए चले थे।

तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार

लौटते समय गंगोत्री से बीस किलोमीटर आगे प्रकृति राह रोककर खड़ी हो गई। सड़क बंद होने से हजारों वाहन वहां फंसे रहे।

तस्वीरों में: कुदरत के कहर के बाद बचाव की कोशिश

गांव के 22 लोग गए थे, लेकिन 12 ही दून पहुंच पाएं हैं। बाकी अब भी बीच रास्ते में फंसे हैं। रामरती बताती हैं कि प्रकृति ने जो कहर बरपाया उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत

नीचे उफनती नदी, ऊपर से पत्थर-बोल्डर गिरने का डर, न जाने किस पल मौत सामने आ जाए। यात्री रघुवीर सिंह माहेडा ने बताया कि प्रशासन की ओर से यात्रियों को कोई मदद नहीं मिल पाई।
विज्ञापन
विज्ञापन


चंदा जमा कर मंगाया जेसीबी के लिए तेल
यात्रियों ने बताया कि मार्ग में गिरे मलबे को हटाने के लिए जेसीबी पहुंची, लेकिन कुछ ही देर में तेल खत्म हो गया। हजारों यात्रियों से दस-दस रुपये जमा कराए गए, तब कहीं जाकर तीन दिन बाद मार्ग खुल पाया।

यात्रियों से हुई खूब लूट
दून पहुंचे यात्री बताते हैं कि 170 रुपये प्लेट चावल मिल रहा था, चाय 15 रुपये में। यात्रियों से मनमाने रेट वसूले गए, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें