फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार धाम यात्रा पर कितने भक्त निकले, किसी को नहीं पता

Fri, 21 Jun 2013 05:08 PM IST
देहरादून/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड में बारिश के बाद आई तबाही ने शासन-प्रशासन की ओर से चार धाम यात्रा के लिए की गई व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
विज्ञापन


आपदा के बाद जगह-जगह फंसे हजारों तीर्थयात्रियों को कई दिन बाद भी नहीं निकाला जा सका है। देश भर से लोग उत्तराखंड आकर चारधाम यात्रा पर निकले अपने रिश्तेदारों को खोज रहे हैं।

तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार

अगर प्रशासन के पास यात्रियों के राज्य में आने का ब्यौरा होता, तो मरने वालों की तादाद का सही पता चल पता। लेकिन राज्य सरकार सहित किसी भी सरकारी एजेंसी को नहीं मालूम कि तबाही के वक्त केदारनाथ दर्शन के लिए कितने लोग आए हुए थे।
विज्ञापन


उत्तराखंड के कई संगठन कई सालों से सरकार से चारधाम यात्रा पर आने वालों श्रद्वालुओं का रिकॉर्ड रखने का आग्रह कर रहे हैं। लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। यही वजह है कि सरकार अब तक नहीं बता पाई कि आखिर इस तबाही में कितने लोग मारे गए हैं।

उत्तराखंड की तबाही पर संपूर्ण कवरेज देखने के लिए क्लिक करें

ऋषिकेश के प्रवेश द्वार पर ही यात्रियों का नाम-पता दर्ज करने की व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कैलाश मानसरोवर, अमरनाथ और वैष्णो देवी जैसे पर्वतीय तीर्थस्थलों पर यात्रियों के पंजीकरण की व्यवस्था है, जिससे भक्तों की सही तादाद का ब्योरा रहता है। लेकिन उत्तराखंड ने कभी इसकी सुध नहीं ली।

तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत

करीब 1,100 सड़कें और 94 से ज्यादा पुल के बह जाने से फंसे लोगों तक पहुंचने में परेशानी सामने आ रही है। अब कहा जा रहा है कि सैटेलाइट और टोही विमानों से तस्वीरें ली जाएंगी, जिससे पहाड़ियों पर फंसे लोगों को पता लगाया जा सके। इसके साथ ही राहत के लिए हेलीकॉप्टरों की संख्या बढ़ाने की बात भी कही जा रही है।
विज्ञापन


उत्तराखंड अपडेटः 1,100 सड़कें गायब, 94 पुल भी बहे

लेकिन ऐसा करने में बहुत देर कर दी गई है। इतने समय में बहुत से लोग ऐसे होंगे जो दम तोड़ चुके होंगे या तोड़ देंगे। अगर आपदा के तुरंत ऐसे इंतजाम किए जाते तो अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती थी। फंसे लोगों तक राहत भी जल्द पहुंच पाती।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें