उत्तराखंड में बिजली के पोल पर चढ़ी हुई कोई महिला या लड़की दिखाई दे तो चौंकने की बात नहीं है। वह लाइन ठीक कर रही होगी क्योंकि पढ़ाई-लिखाई में ही नहीं मेहनत के कामों में भी महिलाएं पुरुषों के वर्चस्व को चुनौती दे रही हैं।
बिजली विभाग ने करीब आठ साल पहले लाइन मेंटिनेंस के काम के लिए स्वयं सहायता समूहों की मदद लेनी शुरू की थी। अब महिलाओं के कई ऐसे समूह सामने आए हैं जो यह काम करना चाहते हैं।
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ठेके पर व्यवस्था
गढ़वाल में महिलाओं का एक ग्रुप लाइन मेंटिनेंस का काम कर भी रहा है। ऐसे ग्रुपों को प्रोत्साहित करने के लिए बिजली विभाग ने इनका मानदेय भी बढ़ा दिया है।
लाइन मेंटिनेंस का काम तीन तरीकों से होता है। पहला विभाग के कर्मचारी खुद यह काम करते हैं। लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते यह काम अब ठेके पर और स्वयं सहायता समूहों से भी कराया जा रहा है।
लाइन मेंटिनेंस का काम
कुमाऊं में इस समय नैनीताल, काशीपुर, बाजपुर और रुद्रपुर में चार ग्रुप काम कर रहे हैं। काम के लिए कई ग्रुपों ने आवेदन किया है। इसमें महिलाओं के भी कई ग्रुप हैं। इनका चयन बिजली विभाग के अधिकारियों को करना है।
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अधीक्षण अभियंता एचके गुरुरानी ने बताया कि कुमाऊं में अब तक महिलाएं केवल बिल वितरण का ही काम करती थीं, जबकि गढ़वाल में एक ग्रुप लाइन मेंटिनेंस का काम भी कर चुका है।
1500 रुपये की वृद्धि
गुरुरानी ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों को प्रेरित करने के लिए इनके मानदेय में भी वृद्धि की गई है। पहले ग्रुप में प्रति व्यक्ति करीब 6307 रुपये मानदेय मिलता था।
अब इसमें करीब 1500 रुपये की वृद्धि हुई है। जल्द बिजली विभाग के साथ काम कर रहे ग्रुप के सदस्यों को 7974 रुपये मानदेय मिलने लगेगा।