फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बनने जा रहा है ऐसा जू, जो पहले देखा ना सुना!

Mon, 21 Oct 2013 05:57 PM IST
अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड में चिड़ियाघर की जगह का चयन हो गया है। सत्तर के दशक में जहां हल्द्वानी के गौलापार किशनपुर जंगल में बाघों का शिकार (शूटिंग रेंज) होता था, वहां अब चिड़ियाघर बनेगा।
विज्ञापन


निजी कंपनी के प्रतिनिधि सरकारी अफसरों के साथ जंगल पहुंचे तो जंगल को देख दंग रह गए। तय हुआ कि यहां पर उत्तर भारत का सबसे बड़ा चिड़ियाघर बनाया जाएगा। इसमें वाइल्ड कंजरवेशन से लेकर पर्यटकों के लिए हर सुविधा जुटाई जाए।

पढें, नक्कालों ने बिगाड़ दी HMT की 'टाइमिंग'!

बाघों के शिकार के लिए शूटिंग रेंज
गौलापार किशनपुर का इलाका बाघों, तेंदुए और हाथी आदि वन्यजीवों से भरपूर रहा है। बाघों की संख्या का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां पर बाघों के शिकार के लिए शूटिंग रेंज बनाई गई थी, जहां डीएफओ का परमिट लेकर बाघों का शिकार होता था।
विज्ञापन


बाद में वाइल्ड लाइफ एक्ट लागू होने के बाद यहां शिकार प्रतिबंधित कर दिया था। यह जंगल गोठ, खत्तों के कब्जों के बाद भी घना बना हुआ है।

सुब्रहमण्यम साइट देखकर दंग रह गए
अफ्रीका में जू बना चुके एवं कालेज डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड मुंबई के प्रमुख सुब्रहमण्यम साइट देखकर दंग रह गए। उन्होंने डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते के साथ जंगल को देखा।

पढें, मोदी पर 'ट्रस्ट', बाकी सब भ्रष्टः उमा भारती

यहां पर उन्हें चिड़ियाघर विकसित करने की सारी संभावनाएं मिलीं। अधिकारी मान रहे हैं कि हल्द्वानी से दूरी, पहुंचने का रास्ता, प्राकृतिक वास, सुरक्षा और क्षेत्रफल सभी कुछ मुफीद है।

एलिफेंट सफारी भी उपलब्ध होगी
मौके पर ही जंगलात के अधिकारियों के साथ प्रारंभिक प्लान तैयार किया गया है। तय हुआ कि इसमें लखनऊ चिड़ियाघर की तरह ट्वाय ट्रेन चलेगी, जिसमें बैठकर जू देखा जा सके। इसके अलावा एलिफेंट सफारी भी उपलब्ध होगी। शानदार फिश एक्वेरियम बनेगा।

साथ ही प्राकृतिक नदियों का इलाका विकसित किया जाएगा। गोल्फ कोर्स की तरह कुछ जगहों पर छोटे वाहन भी चलेंगे। डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते के मुताबिक 300 से 500 हेक्टेयर एरिया में जू बनाने की योजना है। प्रयास है कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा जू बने। इसमें रेस्क्यू सेंटर, ब्रीडिंग सेंटर आदि भी होगा।

100 साल से पुराना रेस्ट हाउस
किशनपुर का रेस्ट हाउस ही हेरिटेज श्रेणी में आता है। रेस्ट हाउस 1911 में बनाया गया था। इसका शिल्प और मजबूती अब भी देखने लायक है। यहां के रिकॉर्ड के अनुसार जंगल देखने स्पेन, जर्मनी आदि के राजदूत लगातार यहां पर आते रहे हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें