उत्तराखंड में हरिद्वार में गंगाघाट पर हुई निर्माणों को ध्वस्त करने का हाईकोर्ट का आदेश अधिकारियों के गले की हड्डी बन गया है। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा की गंगा तट कहां तक है। इसके बारे में किसी भी प्रशासनिक अधिकारियों को पता नहीं है।
इसके बाद अब शासन स्तर पर एक कमेटी बनी है जो बताएगी की गंगा का दो सौ मीटर का तट कहां से माना जाए। शासन स्तर पर कमेटी बनने के बाद हरिद्वार विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से हरिद्वार, ऋषिकेश, पौड़ी, टिहरी, देहरादून के राजस्व अधिकारियों के साथ बनाई गई संयुक्त कमेटी को समाप्त कर दिया गया है।
होटल मालिकों का दबाव
उपाध्यक्ष डॉ. रंजीत कुमार सिंहा ने बताया कि शासन स्तर पर कमेटी बनाए जाने के बाद हविप्रा की कमेटी समाप्त कर दी गई है। उपाध्यक्ष ने राजस्व अधिकारियों के साथ बैठक कर राजस्व अभिलेखों के आधार पर गंगा तट से 200 मीटर दूरी निर्धारित करने का निर्णय सितंबर के अंतिम सप्ताह में लिया था, लेकिन भूमाफिया, बिल्डरों और होटल मालिकों के दबाव में शासन ने मामला लटकाने के लिए एक और कमेटी बना दी है।
प्राधिकरण क्षेत्र में गंगा नदी कई जगह पर भिन्न-भिन्न रूप में बहती है। सबसे बड़ा विवाद हरिद्वार में बहने वाली गंगा को लेकर है। होटल मालिक अवैध निर्माणों को बचाने के लिए हरकी पैड़ी पर गंगा के अस्तित्व को ही नकार रहे हैं और हविप्रा भी उनकी हां में हां मिलाने को तैयार है।
शासन स्तर पर बनी कमेटी कब तक 200 मीटर का निर्धारण कर देगी यह प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भी पता नहीं है। माना जा रहा है कि पूरी कवायद हाईकोर्ट के आदेश को पलीता लगाने के लिए की जा रही है।