उत्तराखंड में बाढ़ प्रभावित इलाकों से ज्यादातर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद अगली चुनौती सिर पर है।
भारी बारिश, बादल फटने और बाढ़ से तबाह हुए गांवों में बसे लोगों के पास न तो सिर पर मकान बचे हैं और न राशन।
चौमासी गांव के ग्राम प्रधान सुरेंद्र ने कहा, 'हमारे पास तीन से चार दिन का राशन बचा है। एक पुल था, जो हमें गुप्तकाशी से जोड़ता था, लेकिन अब वह बह चुका है। गांव पूरी तरह कट चुका है।'
तबाही के आसपास के गांवों में ग्रामीण अपनी दुनिया दोबारा बसाने की बहुत कोशिश कर रहे हैं, बिजली न होने, पीने के पानी के लिए मारामारी और राशन खत्म होने से काफी मुश्किलें पेश आ रही हैं।
जलमाला गांव के प्रधान त्रिलोक सिंह रावत ने कहा, 'भारी बारिश 15 जून से शुरू हुई और हम तभी से बिना बिजली के हैं। हम दिक्कतों के दुष्चक्र में फंसे हैं। मदद के लिए हमें प्रशासन से संपर्क करना है, लेकिन बिना बिजली के यह मुमकिन नहीं, क्योंकि फोन चार्ज नहीं हो रहे।'
उन्होंने कहा, 'खाने के लिए हमें सप्लाई लाइन और सड़क चाहिए। लेकिन सभी सड़क खत्म हो चुकी हैं।' इस बीच केंद्र सरकार ने बाढ़ से तबाह हुए चार धाम के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए 195 करोड़ रुपए का पैकेज देने की घोषणा की है।
उत्तराखंड के दौरे पर आए केंद्रीय पर्यटन मंत्री के चिरंजीवी ने आज बताया कि पैकेज को केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के प्रमुख मंदिरों और इन्हें जोड़ने वाली सड़कों की मरम्मत में खर्च किया जाएगा।