राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत स्वास्थ्य महानिदेशालय में तैनात छह संविदा कर्मचारियों ने अधिकारियों पर उत्पीड़न और शोषण का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है।
इन सभी का अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो रहा था। उन्होंने त्यागपत्र भेजकर अपना अनुबंध आगे ना बढ़ाए जाने का अनुरोध किया है। एनएचएम के तहत संचालित कार्यक्रमों के संचालन के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय में कई कर्मचारियों की संविदा पर तैनाती की गई है।
31 मार्च को इन सभी का अनुबंध समाप्त हो गया, जिसे एक अप्रैल को रिन्यू किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही छह कर्मियों ने त्यागपत्र भेजकर अनुबंध नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया।
इस्तीफे में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें आधी रात तक दफ्तर में रोका जाता है। छुट्टी और रविवार के दिन भी दफ्तर बुलाकर परेशान किया जाता है। इसके बदले उन्हें समायोजित अवकाश या अतिरिक्त भत्ता नहीं दिया जा रहा है।
कार्यस्थल का माहौल ठीक नहीं होने का आरोप
अमरीन नकवी, पूजा रावत, मधु नेगी, रामकृष्ण भट्ट, संदीप और आनंद सिंह पंवार ने अपने इस्तीफे में कार्यस्थल का माहौल ठीक नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने दो उच्चाधिकारियों की ओर इशारा करते हुए उत्पीड़न करने का आरोप लगाया।
लिखा है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ माह में दोनों अधिकारियों के रवैये के कारण करीब दो दर्जन लोग नौकरी छोड़ चुके हैं।
कर्मचारियों के उत्पीड़न और शोषण की बात गलत है। छह में से तीन को कहीं और नौकरी मिल गई होगी। दो लोगों ने लिखित माफी मांगकर दोबारा ज्वाइन कर लिया है। नौकरी छोड़ने और अनुबंध आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से किया होगा।
- डा. नीरज खैरवाल, एमडी, एनएचएम
मार्च फाइनल को देखते हुए काम तेजी से निपटाने की कोशिश हो रही थी, इसलिए हो सकता है किसी को देर रात तक रोका गया होगा। पांच ने इस्तीफा दिया था, उनमें से दो ने दोबारा ज्वाइन कर लिया है। बाकी कर्मचारियों को कहीं और नौकरी मिल गई होगी इसलिए उन्होंने यह बहाना बनाया होगा।
- डा. सरोज नैथानी, संयुक्त निदेशक