राजजात आयोजित करने की धार्मिक परंपरा भले ही प्रत्येक 12 साल की है, लेकिन अभिलेख इस बात की पुष्टी नहीं करते। मां नंदा को हिमालय भेजने की यह ऐतिहासिक यात्रा वर्ष 1843 से लेकर 2000 तक के आयोजन में कभी भी नियमित 12 साल के अंतराल में आयोजित नहीं हो पाई है।
280 किमी की यह यात्रा गढ़वाल और कुमाऊं की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत मानी जाती है। गढ़वाल राजा द्वारा प्रति 12 वर्ष में मां नंदा की हिमालयी यात्रा के राजशाही दौर के प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन जब से इस यात्रा के प्रमाण मिले हैं, यह कभी भी 12 साल के अंतराल में नहीं हुई है।
यहां तक कि वर्ष 1925 के बाद यात्रा 26 साल के अंतराल में वर्ष 1951 में हुई, लेकिन खराब मौसम के चलते यह पूरी नहीं हो सकी। वर्ष 1987 के बाद भी 13 साल बाद पिछली बार 2000 में हुई थी।
राज्य निर्माण के बाद पहली बार आयोजित होने वाली मां श्रीनंदा राजजात को जहां वर्ष 2012 में भादो माह में मलमास के कारण एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया था, वहीं इस वर्ष यह जून में केदारनाथ सहित क्षेत्रों में आई आपदा के चलते इसे इस वर्ष भी स्थगित किया गया है।
कब-कब हुई राजजात
राजजात समिति के अभिलेखों के अनुसार हिमालयी महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात वर्ष 1843, 1863, 1886, 1905, 1925, 1951, 1968, 1987 तथा 2000 में आयोजित हो चुकी है।
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