लोहाली में नौजवान बालम सिंह की असमय मौत से परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है जिसने पूरे परिवार को बिखेर दिया। इकलौता बेटा परिवार पालने के लिए बेंगलूरू के एक होटल में काम करता था। बीमार पिता की सेवा के लिए वह छुट्टी पर घर आया था।
लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी छुट्टियां होंगी। बालम बीमार पिता और दिव्यांग मां के बुढ़ापे की इकलौती लाठी था। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जिस बीमार पिता की सेवा के लिए बालम सिंह बैसाखी की खुशियां लेकर घर पहुंचा था, उन्हीं की आंखों के सामने इकलौते बेटे की लाश पड़ी है।