सात वर्ष बीत गए मगर सरकारी काम की गति ने कछुआ चाल को भी पीछे छोड़ दिया। सात वर्षों में 70 बेड के महिला अस्पताल की निर्माणाधीन बिल्डिंग का काम पूरा नहीं हो सका है। अलबत्ता 3.54 करोड़ रुपये से पूरी होने वाली बिल्डिंग की कीमत वर्तमान में बढ़कर साढ़े छह करोड़ से अधिक हो गई है।
महिला अस्पताल में अभी 30 बेड हैं। अस्पताल पर लगातार बढ़ रहे दबाव को देखते हुए 70 बेड और बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 2009 में काम शुरू हुआ। 70 बेड की नई बिल्डिंग पर 3.54 करोड़ रुपये खर्च होने थे। सरकार की ओर 1.50 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई।
निर्माणाधीन बिल्डिंग का काम 2012 तक पूरा हो जाना था। वर्ष 2011 में शासन की ओर से फिर कुछ धनराशि अवमुक्त की गई। काम न पूरा होने के कारण बिल्डिंग की लागत बढ़ती गई और कीमत 5 करोड़ 34 लाख 24 हजार पहुंच गई। 18 जून 2013 को दोबारा शासन से धनराशि मांगी गई।
मार्च 2015 तक काम पूरा होने की मियाद तय की गई और एक करोड़ की राशि शासन से स्वीकृत हुई। अस्पताल की कुल लागत 6.70 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है और शासन से 4.04 करोड़ रुपये मिले हैं। अभी भी अस्पताल में लिफ्ट लगने समेत अन्य काम लटके हुए हैं।
निर्माण कार्य का जिम्मा पेयजल निर्माण निगम रामनगर को दिया गया है। मरीजों को सुविधाएं कब मिलना शुरू होगी इसका भगवान ही मालिक है।
बजट के अभाव में काम रुका हुआ था। पिछले वित्तीय वर्ष में एक भी पैसा नहीं मिला। इस वर्ष एक करोड़ रुपये मिले हैं, जिससे फिर से काम शुरू कर दिया गया है। एक करोड़ 64 लाख रुपये और मिलना शेष है, जिसे अनुपूरक बजट में रखा गया है। उक्त धनराशि अगर मिल जाती है तो लिफ्ट लगने समेत अन्य काम अप्रैल 2016 तक पूरा हो जाएगा।