इससे विवाद और राजनीति का विषय नहीं बनाना चाहिए। यह न्याय से जुड़ा मामला है। वैसे तो नैनीताल में जहां उच्च न्यायालय स्थित है उस जगह का चयन बहुत सोच समझकर किया गया था। अगर स्थानांतरित करना ही है तो सबसे उपयुक्त जगह काशीपुर में हेमपुर डिपो के पास कुंडेश्वरी में है।
-अर्चना चौहान, गैर चिह्नित राज्य आंदोलनकारी और शिक्षाविद्।
यह मामला कुमाऊं के हर व्यक्ति की भावना और हितों से जुड़ा है। यदि कुमाऊं के लोग राजधानी देहरादून पहुंच सकते हैं तो गढ़वाल के लोगों को भी नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इस पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
- सुनीता तिमोती, प्रधानाचार्य, एडम्स गर्ल्स इंटर कॉलेज, अल्मोड़ा।
हाईकोर्ट को कुमाऊं से शिफ्ट करने से लिए अच्छा संदेश नहीं जाएगा। हल्द्वानी के गौलापार या फिर ऊधमसिंह नगर में स्थापित किया जाए। रुद्रपुर, किच्छा में हाईकोर्ट स्थापित करने के लिए काफी जमीन उपलब्ध है। इस जमीन पर कोई वन भूमि का अड़ंगा भी नहीं है।
-अनिता पंत, अधिवक्ता रुद्रपुर।
उच्च न्यायालय ऐसे स्थान पर हो जहां वादकारी आसानी से पहुंच सकें और न्याय पाने के लिए उसकी आसान एप्रोच हो। इस लिहाज से उच्च न्यायालय कुमाऊं में ही ठीक है। अगर नैनीताल से शिफ्ट करना जरूरी भी है तो उसे काशीपुर-रामनगर के बीच स्थानांतरित किया जाना बेहतर होगा -कामिनी श्रीवास्तव, अधिवक्ता, काशीपुर।
राज्य बनने के बाद लगा कि राजधानी, हाईकोर्ट, एम्स समेत उच्च स्तरीय संस्थान संस्थान पहाड़ आएंगे और मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे लोगों को सुविधा मिलेगी, लेकिन पहाड़ से उच्च संस्थानों को मैदान ले जाना जनभावनाओं के अनुकूल नहीं है।
-मुन्नी तिवारी, राज्य आंदोलनकारी, नैनीताल।
दून में अस्थायी राजधानी की घोषणा के बाद यहां की जिला बार ने नैनीताल में हाईकोर्ट की स्थापना के लिए लड़ाई लड़ी। दो दशक से अधिक समय से बने हाईकोर्ट में अरबों रुपये खर्च कर सुविधाएं जुटाई जा चुकी हैं। अधिवक्ता बेहतर कार्य कर रहे हैं। इसे यहां से शिफ्ट न किया जाए। - मंजू कोटलिया, अधिवक्ता, नैनीताल