नैनीताल। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के तत्वावधान और कुमाऊं विवि शिक्षणेत्तर संघ की ओर से रविवार को प्रारूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 विषय पर एक दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति में दूरस्थ दृष्टिकोण नहीं दिखता।
मुख्य अतिथि सांसद अजय भट्ट ने कहा कि सरकार शिक्षा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के लिए कुविवि को चुना, इसके लिए वह महासंघ को धन्यवाद देते हैं। संगोष्ठी में चर्चा के बाद जो भी निष्कर्ष सामने आएगा, उसे वह सदन में प्रमुखता से रखेंगे।
इससे पहले डीएसबी के एएन सिंह सभागार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य अतिथि सांसद भट्ट, अति विशिष्ट अतिथि विधायक संजीव आर्य, विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल, प्रो. जीतराम, कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रो. केएस राना और महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएस होटा ने शुरुआत की। इसमें देशभर के 58 विश्वविद्यालयों के 226 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
इस दौरान विवि के कर्मचारियों ने विवि में मौजूद समस्याओं को सांसद के समक्ष रखा और उनके निराकरण की मांग की। संगोष्ठी में अतिथियों द्वारा महासंघ की ओर से प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया। इस दौरान महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव बीएस सज्जन, कुलसचिव डॉ. महेश कुमार, दिनेश कुमार राणा, प्रो. भगवान सिंह बिष्ट, प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, महेंद्र सिंह राणा, कार्यक्रम संयोजक केएस जलाल, महासंघ समन्वयक बीएस करायत, एसएस मेहरा, डीएस धामी, आरएस गुसाई, कुलदीप सिंह आदि थे। संचालन डॉ. एलएस रौतेला ने किया।
शिक्षा को व्यवसायीकरण की दौड़ में शामिल करना चाहती है सरकार
शिक्षा नीति 2019 को लेकर आयोजित की गई राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। शिक्षा नीति को लेकर कोई भी एकमत नही दिखा किसी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षा को व्यवसायीकरण से जोड़ा जा रहा है तो किसी ने कहा कि इस शिक्षा नीति में बहुत सी अच्छी बाते भी है जिससे देश का विकास होगा।
शिक्षा नीति 2019 में बहुत से अच्छे प्रावधान किए गए हैं, जिससे देश का विकास होगा, लेकिन नई शिक्षा नीति में बहुत से ऐसे प्रावधान भी शामिल हैं, जिससे शिक्षा निजीकरण की ओर हस्तांतरित हो जाएगी। जो कि शिक्षा क्षेत्र के लिए घातक है। शिक्षा नीति को 700 पेजों में समाहित किया हुआ है, लेकिन पूरी शिक्षा नीति में गैर शिक्षण कर्मचारियों का कहीं भी कोई उल्लेख नहीं है। -बीएस होटा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ।
नई शिक्षा नीति में यूजीसी को खत्म कर नया शिक्षा आयोग बनाने की तैयारी की जा रही है, जिसका प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री और एचआरडीसी मंत्री करेंगे। गैर शिक्षण अधिकारियों से कैसे आयोग का क्रियान्वयन हो पाएगा। इसके अलावा नई शिक्षा नीति में बजट का कहीं कोई प्रावधान नहीं किया गया है, 700 पेजों की रिपोर्ट में कही भी यह उल्लेखित नहीं है कि सरकार शिक्षा पर कितना बजट खर्च करेगी। -बीएस सज्जन, राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ।
नई नीति में प्राइवेट और सरकारी संस्थानों को समान मान्यता देने पर विचार किया जा रहा है, इससे शिक्षा का व्यवसायीकरण बढ़ने के साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता में भी गिरावट आएगी। इसके अलावा नीति में कर्मचारियों के हित के लिए कुछ भी नहीं है।-मनोज कुमार सिंह, जनरल सेक्रेटरी कर्मचारी महासंघ।
राष्ट्र विकास के लिए शिक्षा सबसे अहम कड़ी है। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रारंभिक शिक्षा स्तर के विकास पर अधिक जोर देना चाहिए। काफी हर्ष का विषय है कि गैर शिक्षण कर्मचारी भी शिक्षा नीति को लेकर इतने जागरूक है और आज यहां सैकड़ों की संख्या में देश भर से कर्मचारी एकत्रित हुए हैं। -संजीव आर्य, विधायक नैनीताल।
यह बड़े दुर्भाग्य का विषय है कि देश में कोई शिक्षा मंत्रालय नहीं है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत शिक्षा का क्रियान्वयन किया जा रहा है। शिक्षा में सुधार के लिए व्यवसायिकता को दूर कर इसमें समरूपता लानी होगी। तभी युवाओं और देश का विकास हो पाएगा। -प्रो. केएस राना, कुलपति, कुविवि नैनीताल।