रामनगर। वन्यजीवों के संरक्षण और मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए कंजर्विंग शेयर्ड लैंडस्केप इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन की बैठक का आयोजन शनिवार को रामनगर के ढिकुली स्थित रिजॉर्ट में किया गया। यहां उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा, हिमाचल और महाराष्ट्र के वनाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
मुख्य अतिथि वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वन्यजीवों के लिए राज्यों की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कॉरिडोर बाधित होने से बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर चिंता जताते हुए राजाजी नेशनल पार्क की तर्ज पर कॉरिडोर बचाने और आपसी समन्वय से संरक्षण प्लान बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में वन्यजीव संरक्षण, एंटी पोचिंग, गश्त व्यवस्था, पारस्परिक अंतर राज्यीय समन्वय बैठक आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वहीं बैठक में अलग-अलग राज्यों में शुगर केन लेपर्ड, वन्यजीवों की मृत्यु समेत अन्य चुनौतियों के साथ ही अलग-अलग राज्यों में संरक्षण सफल मॉडल और अनुभव साझा कर अन्य राज्यों में भी समन्वय स्थापित करने रणनीति बनाई गई।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बीते कुछ सालों में बाघ, हाथी समेत अन्य वन्यजीवों के कॉरिडोर बाधित हुए हैं। इसके चलते वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव आने और वन्यजीवों के आक्रामक होने की घटनाएं बढ़ी हैं।
वन्यजीवों की बढ़ती आबादी बन रही चिंता का विषय
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने वन्यजीवों की असामान्य रूप से बढ़ रही आबादी को लेकर चिंता जताई। बाघों और तेंदुओं की तेजी से बढ़ती आबादी जहां जंगल की धारण क्षमता से अधिक पहुंच गई है। वहीं बढ़ती संख्या से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अध्ययन और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से इस चुनौती का समाधान खोजने पर चर्चा की।
बाघों और तेंदुओं में इनब्रीडिंग को लेकर हुई चर्चा
शनिवार को बैठक के दौरान बाघों के बाधित होते कॉरिडोर के चलते बाघ एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जा रहे। ऐसे में बाघ अपने ही परिवार में संबंध बना रहे हैं। इस पर वनाधिकारियों ने चिंता जताते हुए अलग-अलग सुझावों पर चर्चा की ताकि बाघों और तेंदुओं की जनसंख्या को सीमित किया जा सके।
ये अधिकारी रहे मौजूद
डब्ल्यूआईआई निदेशक डॉ. जीएस भारद्वाज, एडीजी रमेश कुमार पांडेय, डीजी एसके अवस्थी, एडीजी एंड मेंबर सेक्रेटरी एनटीसीए संजय कुमार पाठक, यूपी हॉफ सुनील चौधरी, हॉफ हरियाणा केसी मीणा, सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू हरियाणा नवदीप सिंह, एपीसीसीएफ उत्तराखंड डॉ. विवेक पांडेय, सीसीएफ यूपी पीपी सिंह, सीएफ यूपी आदर्श कुमार, सीटीआर निदेशक डॉ साकेत बडोला, उपनिदेशक राहुल मिश्रा आदि मौजूद थे।