रामगढ़। पांच दिन पहले रामगढ़ ब्लॉक के झूतिया और सकुना गांव में आई आपदा का खौफनाक मंजर देख वहां काम कर रहे मजदूर दहशत में हैं। वह अब एक पल भी वहां नहीं रहना चाहते। कुछ मजदूर तो अपने घरों को लौट चुके हैं और कुछ लौट रहे हैं। शुक्रवार को ग्राउंड जीरो पर पहुंची अमर उजाला की टीम को रास्ते में कुछ ऐसे ही मजदूर पैदल लौटते हुए मिले। बातचीत में ही उनके चेहरों से आपदा का भय साफ झलक रहा था। बोले भगवान से यही प्रार्थना है कि अब तो सकुशल घर पहुंच जाएं।
झूतिया गांव निवासी एक ठेकेदार के यहां पास की नदी से रेता-बजरी निकालने का काम करने वाले चार मजदूर हमें मल्ला रामगढ़ से पांच किलोमीटर पहले मिले। टूटी फूटी और कीचड़युक्त सड़क को पार कर वहां तक पहुंचे इन मजदूरों ने बताया कि आपदा वाले दिन (18 अक्तूबर) वह नदी किनारे ही अपनी झोपड़ी में मौजूद थे। नदी में पानी बढ़ता देख वह पहाड़ी के ऊपर की ओर रहने वाले ठेकेदार के यहां चले गए और उनकी जान बच गई।
मजदूरों का कहना था कि 20 अक्तूबर तक उनके पास राशन था। आपदा के बाद दुकानें बंद थी। उसके बाद राशन भी नहीं मिला। दो दिन बिस्किट, नमकीन खाकर काटे और शुक्रवार सुबह घर लौटने का फैसला कर लिया। शुक्रवार की सुबह झूतियां गांव से अपना सामान उठाया और पैदल ही मल्ला रामगढ़ की ओर बढ़ चले क्योंकि यह सड़क कई जगह उखड़ चुकी है और कई जगह इसमें मलबा आया है। लिहाजा इक्का-दुक्का वाहन ही इस रोड पर चल रहे हैं। मजदूरों ने बताया कि सुबह छह बजे से निकले थे। करीब 15-16 किलोमीटर की दूरी तय कर शुक्रवार दोपहर में मल्ला रामगढ़ पहुंचे। कहा कि वहां से आगे भवाली तक का सफर भी पैदल ही तय करेंगे। कहा कि उनके पास न तो खाने के लिए राशन है और न जेब में पैसा। यह सुन अमर उजाला टीम ने इन चार मजदूरों की आर्थिक मदद कर रास्ते में भोजन कर लेने को कहा। इस पर इन मजदूरों ने अमर उजाला का भी धन्यवाद अदा किया।