मरचूला हादसे को डेढ़ महीना भी नहीं हुआ है। परिजन 36 लोगों की मौत को अभी भूल नहीं पाए कि पहाड़ की लाइफलाइन कही जाने वालनी रोडवेज सुरक्षा को धता बताकर सड़कों पर दौड़ रही है। बिना शीशे, कमजोर टायर आदि कमियां फिर हादसे को आमंत्रित कर रही हैं।
अल्मोड़ा में हुए मरचूला हादसे को डेढ़ महीना भी नहीं हुआ है। परिजन 36 लोगों की मौत को अभी भूल नहीं पाए कि पहाड़ की लाइफलाइन कही जाने वालनी रोडवेज सुरक्षा को धता बताकर सड़कों पर दौड़ रही है। बिना शीशे, कमजोर टायर आदि कमियां फिर हादसे को आमंत्रित कर रही हैं।
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चार नवंबर को मरचूला हादसे में जिम्मेदारों की लापरवाही से 36 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इसके बाद से परिवहन निगम लगातार वाहनों पर चालानी कार्रवाई कर रहा है। मगर परिवहन निगम के वाहनों में खामियां ही खामियां हैं। अमर उजाला ने रविवार को हल्द्वानी बस स्टेशन पर रोडवेज बसों की हकीकत जानी। पेश है परिवहन निगम के सुरक्षित सफर के दावों की पोल खोलती अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट-
पीछे वाला शीशा ही नहीं
लोहाघाट डिपो की बस यूके 07 पीए 3281 रोजाना लोहाघाट से नैनीताल के लिए चलती है। पर इस बस में पीछे का शीशा ही नहीं है। इसकी जगह पॉलीथिन लगी है। भीषण ठंड में हवा के साथ ही यह कमी यात्रियों के लिए असुरक्षित है।
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सीटें तो हैं मगर बैठने लायक नहीं
रामनगर डिपो की बस यूके 07 पीए 3223 रविवार को हल्द्वानी बस स्टेशन पर खड़ी थी। रामनगर जाने वाली इस बस में सीटें तो हैं लेकिन उनकी हालत बैठने लायक नहीं है। कवर फटे हैं, आधा फोम गायब है। लोग इन सीटों पर बैठने से बचते हैं।
फर्स्ट एड बॉक्स में दवा नहीं सीसीटीवी खराब
हल्द्वानी डिपो की बस यूके 04 पीए 1635 में चालक के पास फर्स्ट एड बॉक्स तो लगा है लेकिन उसमें दवाएं नहीं हैं। इसमें चालक- परिचालक के कुछ कागज रखे हुए हैं। साथ ही आगे-पीछे सीसीटीवी कैमरा तो लगे हैं लेकिन वह काम नहीं करने से शोपीस बना हुआ है। चालक सीट के ऊपर पंखा लगा है लेकिन उसका फ्रेम खुला है।
टायर कब फट जाए पता नहीं
काठगोदाम डिपो की बस यूके 04 पीए 1710 रविवार दोपहर हल्द्वानी स्टेशन पर खड़ी थी। इसके पिछले टायर पर रबर चढ़ी है, जो दूर से खुली दिख रही है। चालक ने बताया कि ये टायर कहीं भी फट सकता है। पूछने पर इसी बस के परिचालक ने कहा कि मैं क्या करूं। रोडवेज में ऐसे ही टायर होते हैं।