उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए निर्देश दिए हैं कि किसी भी आरोपी की उम्र को लेकर संदेह की स्थिति में मजिस्ट्रेट या संबंधित न्यायालय सबसे पहले उसकी उम्र की जांच करेंगे। हरिद्वार से संबंधित हत्या के मामले में सजा काट रहे एक किशोर के मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि वारदात के समय आरोपित उम्र के हिसाब से नाबालिग था। इस निर्णय के बाद आरोपित को अब किशोर न्याय अधिनियम का लाभ मिलेगा।
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी आरोपी की उम्र को लेकर संदेह की स्थिति में मजिस्ट्रेट या संबंधित न्यायालय सबसे पहले उसकी उम्र की जांच करेंगे। जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रजिस्टर और अनुपलब्धता की स्थिति में चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर उम्र तय की जाएगी।
सजा पर रोक और जमानत बरकरार
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की सजा पर पहले से लगी रोक और जमानत आदेश यथावत रहेंगे। साथ ही, निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड किशोर न्याय बोर्ड को भेजा जाएगा ताकि वह कानून के अनुसार मामले का नया निर्णय कर सके।
रजिस्ट्री को दिए ये निर्देश