नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार के पीरान कलियर से होकर गुजरने वाली गंगनहर के पाथों और उसके ऊपर हुए अतिक्रमण को हटाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता से कहा है कि वे इस संबंध में अपना प्रत्यावेदन राज्य के संबंधित विभागों को दें और संबंधित विभाग तीन माह के भीतर उस पर विधि अनुसार निर्णय लेकर आगे की कार्यवाही शुरू करें।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले की अनुसार पीरान कलियर निवासी संदीप शर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार में गंगा नदी से सिंचाई करने के लिए नहरे निकलती है जो उत्तराखंड सहित उत्तर प्रदेश की कई जिलों की सिंचाई भूमि को सिंचती है, उनमें से एक कलियर की पास से गुजरने वाली नहर गंगनहर भी है। याचिका में कहा कि वर्तमान में कई लोगों की ओर से इस नहर क्षेत्र और उसके ऊपर अतिक्रमण करके दुकान, मकान और सब्जी की रेडिया लगाना शुरू कर दिया गया है, जिसकी वजह से नहर से सटे रास्तो में जाम लगने लगा है जिसकी वजह से कभी भी कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है।
याचिकाकर्ता की ओर से अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि नहर की देखरेख उत्तर प्रदेश सरकार करती है ना कि उत्तराखंड सरकार। अभी तक याचिकाकर्ता के द्वारा उन्हें कोई प्रार्थना पत्र नही दिया गया है। जिस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि उनके द्वारा इस संबंध में सिंचाई विभाग को प्रार्थना पत्र दिया गया था उनके द्वारा कहा गया कि अतिक्रमण को हटाने की लिए उनके पास पर्याप्त पुलिस बल नही है। जिस पर कोर्ट ने जिला अधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए हैं कि उनके प्रत्यावेदन पर विधि अनुसार निर्णय लेकर तीन माह की भीतर उचित कार्यवाही करे।