उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (Uttarakhand Vidhyut Samvida Karmchari Sangthan) की कुमाऊं जोन कार्यकारिणी में एक आवश्यक बैठक केंद्रीय कार्यालय कोहली कॉलोनी कुसुमखेड़ा में आयोजित की गई। जिसमें ऊर्जा के तीनों निगमों में वर्षों से रिक्त पदों के सापेक्ष संविदा कार्मिकों के नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, VDA के आदेश को बहाल करने सहित विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई।
इस दौरान कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने उत्त्तराखंड शासन व तीनों ऊर्जा निगम प्रबंधनों द्वारा संविदा कार्मिकों की नियमितीकरण व समान वेतन की मांग पर आजतक कोई ठोस कार्रवाई ना किए जाने पर रोष व्यक्त किया गया। साथ ही 3 माह का समय व्यतीत होने के उपरांत भी VDA के आदेश बहाल न करने पर आक्रोश व्यक्त किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश महामंत्री मनोज पंत ने कहा कि शासन व प्रबंधन के साथ हुए लिखित समझौतों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है क्योंकि संविदा कर्मचारियों को VDA दिए जाने के आदेश पर सीएम, ऊर्जा मंत्री, मुख्य सचिव, अपरमुख्य सचिव, सचिव मुख्यमंत्री/वित्त/ऊर्जा, तीनों निगमों के MD व मोर्चे के पदाधिकारियों की उपस्तिथि में हुआ था। जिसके बाद प्रस्ताव BOD में पास होकर शासन ने आदेश किए थे फिर न जाने कौन सी ताकत के दबाव में VDA के आदेश स्थगित किए गए है।
उन्होंने कहा कि राज्य के तमाम ऐसे विभाग हैं जिन्होंने अपने संस्थानों में कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों को नियमित भी किया है और समान वेतन भी दिया है लेकिन ऊर्जा निगम प्रबंधन के पास वकीलों पर लुटाने को तो पैसा है लेकिन संविदा कर्मचारियों को देने के नाम पर सिर्फ घाटा है। संविदा कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूटता जा रहा और अब अगर शीघ्र ही VDA के आदेश बहाल नहीं गए तो संगठन आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।
चर्चा के दौरान संगठन के परदेश सह सचिव मनोज वर्मा ने कहा कि बगैर वित्तीय लाभ हानि के आंकलन के कतिपय अधिकारियों व ठेकेदारों की सांठगांठ से बिजलीघर, बिजली लाइनें, मीटर रिडिंग, कैश कलेशन का कार्य ठेके पर दिए जाने का चलन चल रहा है जिसकी कीमत आने वाले समय मे राज्य के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं को महंगी बिजली के दाम के रूप में चुकानी पड़ेगी।
संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि अभी तक तीनों निगमों में जो भी कार्य ठेके पर दिए गए हैं उन सभी की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। साथ ही इनका स्पेशल ऑडिट कराया जाए, ताकि यह पता चल सके कि जो कार्य ठेके पर दिए गए हैं उससे कॉरपोरेशन को कुल कितना लाभ हुआ है।
इस दौरान संगठन के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कंचन जोशी ने कहा कि संविदा कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर अल्प वेतनमान में राज्य के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे विद्युत आपूर्ति प्रदान करने में अहम भूमिका अदा कर रही है। लेकिन उसके बदले में प्रबंधन व शासन द्वारा मिलकर संविदा कर्मचारियों शोषण किया जा रहा है जिसे अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर प्रबंधन द्वारा शीघ्र ही निगमों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान वेतन, VDA के आदेश बहाल करने, ठेके पर दिए कार्यों का स्पेशल ऑडिट इत्यादि की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो उत्त्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (इंटक) दीवाली से पूर्व आंदोलन एवं हड़ताल के लिए बाध्य होगा जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी तीनों निगम प्रबंधनों व उत्त्तराखंड शासन की होगी।