हल्द्वानी न्यूरो साइंस सोसाइटी के सहयोग से आयोजित दो दिनी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड न्यूरोकॉम के दूसरे दिन देश के विभिन्न शहरों से पहुंचे न्यूरो साइंस के विशेषज्ञों ने कई अहम जानकारियां आपस में साझा की। इस दौरान मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आपरेशन की कई नई तकनीकों की भी जानकारी दी।
सेमिनार में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के डा. एमसी शर्मा ने मस्तिष्क की जांच के समय की परेशानियां और इसके निदान के बारे में बताया। पीजीआई चंडीगढ़ के न्यूरो सर्जन डा. एमके तिवारी ने ब्रेन के छोटे-छोटे ट्यूमर का इलाज बगैर बड़ा चीरा लगाने (गामा नाइफ) की तकनीक के बारे में बताया। साथ ही, डा. विनोद तिवारी ने निश्चेत हो चुके मस्तिष्क को दोबारा किस प्रकार एक समय सीमा के भीतर दोबारा सही स्थिति में लाने की तकनीक भी बताई।
उन्होंने कंपन की बीमारी का इलाज (सुई को मस्तिष्क में डालकर किस प्रकार किया जा सकता है) की तकनीक के बारे में भी बताया। सेमिनार में डा. डीके वत्सल ने रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर उसके उपचार का तरीका बताया। आयोजक सचिव डा. महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि सेमिनार में पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मध्य प्रदेश, यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान के प्रसिद्ध न्यूरो सर्जन हिस्सा ले रहे हैं।
इस दौरान मेडिकल के 40 छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया। सेमिनार में डा. मजहर हुसैन, डा. वीके ओझा, डा. सुरेश मथुरिया, डा. सुनील गुप्ता, डा. शीबा मलिक ने विचार रखे। इस दौरान डा. राहुल सिंह, डा. रणवीर सोलंकी, डा. दीपक पवार, डा. मिथिलेश पांडे, डा. पुनीत गोयल, डा. लक्ष्मीकांत जोशी, डा. संजीव जेटली, डा. मनोज त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।