नैनीताल। हाईकोर्ट ने आदेश का पालन नहीं करने पर सचिव शहरी विकास, जिलाधिकारी नैनीताल, अधिशाषी अधिकारी नैनीताल, नगर आयुक्त नगर निगम हल्द्वानी और फूड सेफ्टी अधिकारी नैनीताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 25 नवंबर को व्यग्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। शनिवार को नगर आयुक्त हल्द्वानी कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार स्लॉटर हाउस खोलने के लिए लाइसेंस नहीं दे रही है और ना ही प्रदूषण बोर्ड अनुमति दे रहा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार प्रदेश के कई मीट कारोबारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने पूर्व में पारित कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया है। याचिका में कहा गया कि अभी तक स्लॉटर हाउस नहीं बनाए गए हैं, जिसके कारण उनको करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
याचिका में कहा गया कि पूर्व में कोर्ट ने प्रदेश में अवैध रूप से संचालित स्लॉटर हाउसों और उनमें बिक रहे मीट की जांच करने के आदेश सभी जिलाधिकारियों को दिए थे तथा इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था लेकिन अभी तक रिपोर्ट पेश नहीं करने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए शहरी विकास सचिव, जिलाधिकारी नैनीताल, अधिशासी अधिकारी नैनीताल, नगर आयुक्त नगर निगम हल्द्वानी और फूड सेफ्टी अधिकारी नैनीताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 25 नवंबर को व्यग्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने 2011 दिए थे अवैध स्लॉटर हाउसों को बंद करने निर्देश
कोर्ट ने 2011 में प्रदेश में चल रहे अवैध स्लाटर हाउसों को बंद कराने के आदेश दिए थे और सरकार को ये भी आदेश दिए थे कि मानकों के अनुरूप स्लॉटर हाउसों का निर्माण करें। इस आदेश के विरुद्ध सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी लेकिन अभी तक सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। याचिका में कहा कि 2018 में कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने 72 घंटे में सभी अवैध स्लाटर हाउसों को बंद कर दिया लेकिन अभी तक मानकों के अनुरूप स्लॉटर हाउसों का निर्माण नहीं किया। कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब सभी स्लॉटर हाउस बंद है, तो प्रदेश में मीट कहां से आ रहा है।