रामनगर (नैनीताल)। फर्जी जाति और स्थायी प्रमाणपत्र बनाकर उत्तराखंड कोटे से सेना में भर्ती होने वाले दो युवक पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पकड़े गए युवकों में एक केआरसी रानीखेत में ट्रेनिंग ले रहा है, जबकि दूसरा 114 जाट रेजीमेंट फतेहगढ़ में तैनात है। पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर रामनगर ले आई है। यहां दोनों को कोर्ट में पेश किया गया जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है।
रामनगर के पते पर जाति और स्थायी प्रमाणपत्र बनाकर दो युवक उत्तराखंड कोटे से सेना में भर्ती हुए थे। जब सेना ने तहसील रामनगर की ओर से दोनों के दस्तावेजों की जांच करवाई तो मामला सामने आया। पुलिस मुकदमा दर्ज कर और दोनों की गिरफ्तारी में जुट गई। एसआई वीरेंद्र बिष्ट ने बताया कि आकाश सिंह निवासी फलेदाबागर थाना रघुपुरा जनपद गौतमबुद्ध नगर (यूपी) को सोमवार को रानीखेत से गिरफ्तार किया गया। वह केआरसी में ट्रेनिंग ले रहा था। उसकी ट्रेनिंग अंतिम दौर में थी। उसने अपना पता पंजाबी कॉलोनी रामनगर दर्शाया था।
पीरूमदारा चौकी प्रभारी भगवान सिंह मेहर ने बताया कि दूसरे आरोपी कपिल कुमार निवासी हसनपुर कलां थाना किठौर मेरठ (यूपी) को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। वह 2019 में फैजाबाद में सेना भर्ती में उत्तराखंड कोटे से भर्ती हुआ था। ट्रेनिंग करने के बाद वह 114 जाट रेजीमेंट फतेहगढ़ में तैनात था। वह इन दिनों छुट्टी पर अपने घर गया हुआ था, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया है। चौकी इंचार्ज के अनुसार उसने अपने दस्तावेजों में पीरूमदारा क्षेत्र के आमपोखरा का पता दिया था। कोतवाल अबुल कलाम ने बताया कि दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
नगर पालिका और तहसील कर्मियों की भी होगी जांच
रामनगर। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों आरोपियों के स्थायी और जाति प्रमाणपत्र बनाने में शामिल कर्मचारियों को जांच में शामिल किया जाएगा। इसमें नगर पालिका और तहसील के कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
नवंबर में अमर उजाला ने किया मामला उजागर
रामनगर। फर्जी जाति व स्थायी प्रमाणपत्र के आधार पर सेना में भर्ती होने का मामला नवंबर 2020 में अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। 17 नंवबर 2020 को सेना भर्ती में लगाए फर्जी स्थायी और जाति प्रमाणपत्र शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद से पुलिस हरकत में आ गई थी और मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। हालांकि, जिन चार युवकों के नाम उस समय प्रकाश में आए थे, पुलिस उनके खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं कर सकी है। इन दो आरोपियों को पकड़ने में भी पुलिस ने पांच महीने लगा दिए।