नैनीताल। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने मंगलवार को उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लि., उत्तराखंड जल विद्युत निगम लि., पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड व स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर की ओर से दायर एवरेज रिकवरी रेट (एआरआर) एवं टैरिफ याचिकाओं पर जन सुनवाई की। इस दौरान होटल एसोसिएशन, व्यापार मंडल पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व विभिन्न उद्योगों के प्रबंधकों ने कोरोना काल में हुए नुकसान को देखते हुए आयोग से वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए विद्युत दरों में वृद्धि न करने की मांग की।
नैनीताल क्लब के शैले हॉल में आयोग के अध्यक्ष डीपी गैरोला की अध्यक्षता में जनसुनवाई हुई। इसमें आयोग ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए सही करण, वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए वार्षिक समीक्षा एवं वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए दायर एआरआर एवं टैरिफ याचिकाओं पर उपभोक्ताओं व अन्य संबंधित संस्थाओं व लोगों से सुझाव लिए और उनके विचार जाने।
इस दौरान 15 लोगों ने आयोग के समक्ष अपने-अपने सुझाव रखे। अधिकतर उद्यमियों एवं व्यक्तियों ने कोरोना महामारी के चलते बिजली दरें न बढ़ाने, डिफॉल्टर उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड मीटर लगवाने, समय से बिल तैयार कराने और बिल व्यवस्था में सुधार करने की मांग की।
आयोग 10 अप्रैल को सुनवाई कक्ष उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग भवन देहरादून में सुबह 10:30 बजे से दोपहर एक बजे तक उद्योग, व्यावसायिक श्रेणी उपभोक्ताओं की और दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक अन्य शेष सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं की सुनवाई करेगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद विद्युत दरों में वृद्धि के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
जनसुनवाई में आयोग के सदस्य तकनीकी मनोज कुमार जैन, सचिव नीरज सती, वित्त निदेशक दीपक पांडे, निदेशक रजनीश माथुर, उप निदेशक दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।
विद्युत दरों में न्यूनतम वृद्धि का प्रस्ताव: रौथाण
नैनीताल। यूपीसीएल के निदेशक जगमोहन सिंह रौथाण का कहना है कि यूपीसीएल ने गत वर्ष की ट्रूू-अप से संबंधित एक तिहाई राजस्व की कमी (323.78 करोड़) की वसूली प्रस्तावित करते हुए वर्ष 2021-22 की एआरआर तथा विद्युत दरों में वृद्धि अनुमानित की है। अमर उजाला से बातचीत में रौथाण ने बताया कि यूपीसीएल ने वर्तमान में उपभोक्ताओं पर लागू विद्युत दरों में 4.56 प्रतिशत औसत वृद्धि का प्रस्ताव दिया है।
निजी नलकूपों व बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए विद्युत दरों में वृद्धि का प्रस्ताव नहीं है। बताया कि मौजूदा समय में कोरोना से उपजी स्थितियों पर विचार करने के बाद और मौजूदा मुद्रास्फीति की दर को देखते हुए विद्युत दरों में 4.56 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव बेहद न्यूनतम है।
वहीं दूसरी ओर बताया जाता है कि पिटकुल, एसएलडीसी, एवं यूजेवीएनएल ने भी वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए अपनी एआरआर एवं टैरिफ पिटीशन आयोग के समक्ष प्रस्तुत की हैं, यदि आयोग की ओर से इनके दावे स्वीकार किए जाते हैं तो उपभोक्ता टैरिफ में 7.34 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इसके अलावा यदि रेग्यूलेटरी एसेट्स अनुमोदित नहीं की जाती है तो उपभोक्ता टैरिफ में 16.20 प्रतिशत की वृद्धि होगी।