उत्तराखंड के कुमाऊं में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो गया है। जहां मैदानी इलाकों में आज धूप खिली हैं तो वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में बादल छाए हुए हैं। आज पिथौरागढ़ जिले में बादल छाए हैं। ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है।
पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी मल्ला जोहार के लास्पा समेत पंचाचूली, हंसलिंग, नागनीधूरा, छिपलाकेदार, खलिया में भी बर्फबारी हुई है। निचले इलाकों में बारिश से तापमान में गिरावट है। धारचूला की व्यास, दारमा घाटियों के गांवों में भी जमकर बर्फबारी हुई हैं। सर्दी के मौसम की पहली बारिश से लोगों ने गरम कपड़े निकालने शुरू कर दिए हैं।
वहीं, आज चंपावत में धूप खिली हुई है। उधमसिंह नगर में भी बादलों के बीच हल्की धूप खिली हुई है। इसके अलावा अल्मोड़ा और बागेश्वर की बात करें तो यहां भी बादल छाए हुए है।
सोमवार को कुमाऊं में बारिश-अंधड़ से जनजीवन अस्तव्यस्त
कुमाऊं में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और बारिश के साथ चली तेज हवाओं से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। चोटियों पर हिमपात होने से ठंड बढ़ गई है। अंधड़ से कई जगह पेड़ गिरे और साथ ही बिजली सप्लाई भी बाधित हो गई।
तराई समेत कुमाऊं के कई जिलों में बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान हुआ। धान क्रय केंद्रों पर धान भीग गया। उधर, हल्द्वानी में 4 मंजिला भवन की दीवार गिरने से तीन लोग दबकर घायल हो गए। सोमवार दोपहर बाद अचानक छाए काले बादलों और तेज हवाओं के साथ बीच बारिश होने से कई इलाकों में दिन में अंधेरा छा गया। नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग पर दो गांव के पास पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया।
काठगोदाम में एक बुजुर्ग चोटिल
काठगोदाम में ठेली पर पेड़ गिरने से बुजुर्ग चोटिल हो गए और एक घंटे तक यातायात थमा रहा। पनियाली में भी पेड़ गिरने से चार मकानों में दरारें आ गईं। तेज हवाओंसे नैनीझील में ऊंची लहरें उठी जिससे नाव पलट गई। उसमे सवार लोग डूबने लगे। इन लोगाें को दूसरी बोट में सवार लोगों ने बचाया।
पिथौरागढ़ की व्यास और दारमा से लेकर जोहार घाटी तक में खूब हिमपात हुआ।
- सर्दी के मौसम की पहली बारिश से निकले गरम कपड़े।
- पहाड़ में कई स्थानों पर लोगों ने ठंड से बचाव के लिए हीटर और अंगीठी का सहारा लिया।
- पार्वती सरोवर में बर्फ गिरने से किनारे के हिस्से का पानी जमने लगा है।
- बाइक से आदि कैलाश के दर्शन को पहुंचे यात्रियों ने बर्फबारी का भी आनंद उठाया।
- जीबी पंत कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा में 6.4 किमी. प्रतिघंटा के वेग से हवाएं चलीं और आद्रता लगभग 84 प्रतिशत रही।