हल्द्वानी। शौक में शुरू किया गया तंबाकू, गुटखे, सिगरेट आदि का सेवन आदत बनने के बाद कई बार जीवन के लिए खतरा भी बन जाता है। अस्पतालों में सिर और गले के कैंसर से काफी मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार अगर दृढ़ इच्छा शक्ति, कुछ दवा और काउंसिलिंग की मदद ली जाए तो तंबाकू को छोड़ा जा सकता है।
उजाला सिग्नस सेंट्रल हास्पिटल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. शलभ अरोड़ा कहते हैं कि 120 मरीजों को देखा गया। इसमें 80 मरीज हेड एंड नेक कैंसर के थे। इनमें 50 मरीजों को गुटखा आदि खाने से कैंसर की शिकायत थी जबकि तीस मरीजों को सिगरेट के कारण दिक्कत हुई थी। लोग शौक में तंबाकू का सेवन शुरू कर देते हैं जो बाद में जीवन के लिए खतरा बन जाता है। अगर तंबाकू छोड़ दिया जाए तो दिक्कतों से बचा जा सकता है। स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट के विभागाध्यक्ष डॉ. केसी पांडे कहते हैं कि जो मरीज कैंसर के रिपोर्ट होते हैं, उनमें तीस प्रतिशत मामले गले और सिर से संबंधित होते हैं। तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी जीवन के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं।
तंबाकू को छोड़ा जा सकता
हल्द्वानी। वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव सिंघल कहते हैं कि तंबाकू, सिगरेट आदि को छोड़ा जा सकता है। व्यक्ति की दृढ़इच्छा शक्ति, दवा और काउंसलिंग की जाए तो चार सप्ताह में तंबाकू से छुटकारा पाया जा सकता है। इसमें चार दिन काफी मुश्किल के होते हैं, अगर चार दिन की दिक्कत बर्दाश्त कर ली जाए तो इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। कोर्स पूरा होने के बाद तंबाकू के लिए प्रेरित करने वालों से दूरी बनाकर रखें। तनाव वाली स्थितियों से दूर रहें। डॉ. संजय सिंह कहते हैं कि तंबाकू के सेवन से कई और बीमारियों का भी खतरा बना रहता है।