हल्द्वानी। इस बार दो दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बना है। ज्योतिष त्रिभुवन उप्रेती ने बताया कि पुनर्वसु नक्षत्र मंगलवार को पड़ रहा है जो 11.54 बजे तक है। इसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा जो बुधवार 15 अक्तूबर दोपहर 12 बजे तक रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इस बार नक्षत्र के बुधवार को पड़ने के कारण इसे बुध नक्षत्र योग कहा गया है। धन और बुद्धि का कारक होने के कारण बुध पुष्य योग में किए गए कार्य आर्थिक उन्नति में सहायक होते हैं। व्यापार में लाभ और धन प्राप्ति के लिए यह योग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस योग में व्यापार, शिक्षा या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करना बहुत शुभ माना जाता है। बुध पुष्य योग में मंत्र जाप और पूजा का भी विशेष महत्व है। संपत्ति खरीदने, धन निवेश के अलावा गृह निर्माण, पारिवारिक निर्णयों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है।