नैनीताल। नैनीझील के पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन और मछलियों के जीवन के लिए इन दिनों झील को 24 घंटे कृत्रिम ऑक्सीजन दी जा रही है। अन्य महीनों में इसमें लगभग चार से पांच घंटों की कटौती की जाती है। चौबीस घंटे ऑक्सीजन प्लांट खोले जाने के कारण झील का पीएच और ऑक्सीजन लेवल मछलियों के जीवन के अनुकूल बना हुआ है जिसे नियमित रूप से मापा भी जा रहा है।
बता दें कि बीते दशकों में पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन से झील मृत सी हो गई थी। जिला विकास प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2007 में पंतनगर विवि की देखरेख में ग्लोबल एक्वा ट्रीटमेंट टेक्नोलॉली संस्था के माध्यम से कृत्रिम ऑक्सीजन की पहल हुई। तब से अब तक दो प्लांट और 30 डिस्क के माध्यम से झील को ऑक्सीजन दी जा रही है।
इंचार्ज आनंद कोरंगा ने बताया कि अन्य महीनों में प्लांट को करीब चार घंटे बंद किया जाता है लेकिन इन दिनों नैनझील के कैचमेंट में स्थित नालों से मिट्टी, मलबा आदि आने के कारण झील का पारिस्थितिक तंत्र गड़बड़ा रहा है। इस कारण इन दिनों 24 घंटे ऑक्सीजन प्लांट को खोला जा रहा है। वर्तमान में झील के ऊपरी सतह पर ऑक्सीजन स्तर 8.91 है जबकि तलहटी पर 6.23 मिग्रा प्रति लीटर है। वहीं पीएच स्तर 7 से 10 मिग्रा प्रति लीटर है जिसका मानक 7.8 है जबकि पारदर्शिता दो मीटर है। संवाद