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केमू की बसें नहीं चलने से यात्री रहे परेशान

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हल्द्वानी/रामनगर/अल्मोड़ा/बागेश्वर। सरकार की ओर से किराया बढ़ाने की मांग खारिज करने से नाराज कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन (केमू) ने रविवार से बसों का संचालन ठप कर दिया। रविवार को कुमाऊं के 125 रूटों पर केमू की 350 बसों के चक्के थमे रहे। बसों का संचालन न होने से यात्रियों को भारी परेशानी हुई। गंतव्य को जाने के लिए यात्री वाहनों की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। हल्द्वानी और रामनगर से भी पहाड़ की ओर जाने वाली केमू और जेएमओयू की बसों के न चलने से यात्री परेशान रहे। रोडवेज प्रबंधन ने यात्रियों की संख्या को देखते हुए पिथौरागढ़ रूट पर एक और रानीखेत रूट पर दो अतिरिक्त बसें भेजीं।
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शासन की ओर से बसों में सवारियों की संख्या 50 प्रतिशत निर्धारित कर दी गई है लेकिन यात्रियों का किराया नहीं बढ़ाया है। केमू और जेएमओयू प्रबंधन का कहना है कि किराया नहीं बढ़ने के कारण और डीजल के दाम में वृद्धि के कारण उन्हें घाटा हो रहा है। रविवार को बसों का संचालन नहीं हुआ। कई यात्री टैक्सी बुक कर अपने घरों को गए।
केमू को पहाड़ की लाइफलाइन कहा जाता है। कुमाऊं मंडल में केमू की 125 रूटों पर रोजाना 350 बसों का संचालन होता है। अल्मोड़ा केमू स्टेशन से जिले के विभिन्न रूटों पर करीब 44 बसें रोजाना चलती हैं। रविवार को जिले में केमू की 44 बसों का संचालन ठप रहा।
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बागेेश्वर में केमू की 55 गाड़ियों की आवाजाही ठप रही। बसें न चलने से यात्रियों को भारी दिक्कतें हुईं। वाहन स्वामियों का कहना है कि जब तक किराया नहीं बढ़ेगा वाहनों का संचालन नहीं करेंगे। रामनगर से पहाड़ को चार निजी बस ऑपरेटरों की बसें संचालित होती हैं, जिनमें गढ़वाल मोटर यूजर्स की 65, गढ़वाल मोटर ऑनर्स की 40, कुमाऊं मोटर यूजर्स की 80 और कुमाऊं मोटर आदर्श की 60 बसें संचालित होती हैं। इनमें से किसी बस का संचालन नहीं हुआ। हल्द्वानी से चलने वाली केमू की 90 बसों से किसी का भी संचालन नहीं हुआ।
गढ़वाल मोटर यूजर्स की अध्यक्ष रेखा गुसांई का कहना है कि पिछले साल जब लॉकडाउन के बाद संचालन हुआ था, तब 50 प्रतिशत यात्रियों से दोगुना किराया सरकार के निर्देश पर लिया गया था। इस साल सरकार ने बसों में यात्रियों की संख्या 50 प्रतिशत कर दी है, लेकिन किराया बढ़ाने से मना कर दिया है। डीजल के दाम 90 रुपये के पास है और ऐसे में 50 प्रतिशत यात्रियों को लेकर संचालन करना मुश्किल है। जब तक सरकार निजी बस ऑपरेटरों की मांगों को नहीं मानती, तब तक बसों का संचालन बंद रहेगा।
केमू के अध्यक्ष सुरेश डसीला का कहना है कि सरकार ने बसों में यात्रियों की संख्या आधी कर दी है लेकिन किराया अभी भी पुराना ही रखा है। पुराने किराये से बस का डीजल का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। इस कारण हम हड़ताल में हैं।
देघाट को भेजीं रोडवेज की दो बसें
रामनगर। रामनगर डिपो के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी नवीन आर्य ने बताया कि देघाट जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी थीं। दो बसों में 15-15 यात्रियों को भेजा गया, हालांकि फिर भी पहाड़ जाने वाले यात्री डिपो में थे, जो दिल्ली से आने वाली बसों में सवार होकर पहाड़ के लिए गए।
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