किच्छा। किसान चंद्रपाल ने छह महीने तक खेतों में मेहनत के साथ फसल उगाई और कटाई-मढ़ाई के बाद क्रय केंद्र में बिक्री के लिए लाया। उसको उम्मीद थी कि धान बेचने के बाद वह 15 दिन बाद होने वाली बेटी की शादी धूमधाम से करेगा। सिस्टम की फिरकी में घूम रहाचंद्रपाल धान के चक्कर में शादी की तैयारियां नहीं कर पा रहा। वह इतना आजिज आ गया कि उसने अपने हाथों से उगाए धान को जलाने की कोशिश कर डाली। आसपास के लोगों ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। किसानों ने एसडीएम कार्यालय में जाकर प्रदर्शन किया और खरीद शुरू करने की मांग की। यह अकेले चंद्रपाल का ही नहीं बल्कि जिले के तमाम किसानों का दर्द है।
ग्राम दरऊ निवासी चंद्रपाल की बेटी का 15 दिन बाद विवाह है और बहेड़ी से बारात आनी है। चंद्रपाल को बेटी के विवाह के इंतजाम में जुटना है लेकिन वह एक महीने से धान बेचने के लिए दरऊ में केंद्र पर इंतजार में बैठा है। चंद्रपाल ने बताया कि घर जाओ तो परिजन शादी की तारीख नजदीक आने की बात कहते हैं। कहीं से पैसा नहीं मिलने व धान नहीं बिकने पर उसने आवेश में आकर परारी एकत्र की और धान में आग लगा दी। इधर, चंद्रपाल को आग लगाते देख साथ में खड़े किसान सन्न हो गए। आसपास खड़े किसानों ने आग बुझाई।
घटना से गुस्साए दर्जनों किसान बाद में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एसडीएम गौरव पांडे के सामने दर्द रखा। उनका कहना था कि क्रय केंद्र पर लगभग एक माह से धान लाए हैं। उनका धान खरीदा नहीं जा रहा है। फरहाद खान ने बताया कि गांव में एक महीने पहले कांटा लगा था। कांटे पर केवल नौ दिन तक ही तौल हुई। केंद्र प्रभारी ने लिमिट पूरी होने की बात कहकर अपना पल्ला छुड़ा लिया है। प्रभारी का कहना था कि अगर सरकार ने लिमिट खोली तो ही वह तौल कर पाएंगे। बताया कि केंद्र पर 4500 कुंतल धान तुला है। गांव के अमजद खान, जुबैर खान, आदिल खान, अफसर अली खान समेत किसानों का हजारों क्विंटल धान तौल के इंतजार में पड़ा है।
70 क्विंटल धान के लिए संघर्ष बरते बीत गए 20 दिन
कारगिल लड़ाई लड़ चुके गुरनाम रोजाना निराश होकर लौट रहे घर
सुरेंद्र खुराना
किच्छा। कारगिल युद्ध लड़ने वाले ग्राम पटेरी निवासी पूर्व सैनिक गुरनाम सिंह ने धान बेचने केे लिए संघर्ष कर रहे हैं। 20 दिन से गुरनाम रोजाना दोपहर का खाना लेकर घर से आते हैं और धान खरीद की उम्मीद में नवीन मंडी में केंद्र पर बैठते हैं। इसके बाद वे मायूस होकर घर लौट जाते हैं। लापरवाह सिस्टम की करनी सिर्फ गुरनाम ही नहीं बल्कि कई किसान भुगत रहे हैं।
गुरनाम सिंह ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में रहकर राजौरी में कारगिल की लड़ाई लड़ी थी। वे सियाचीन ग्लेशियर, जम्मू, ऊधमपुर आदि जगहों पर तैनात रहे हैं। उनके दोनों बेटे घर से दूर हैं और वे खेतीबाड़ी संभालते हैं। वे 20 दिनों से मंडी में 70 क्विंटल धान तुलवाने की आस में बैठे हैं।
कहते हैं कि क्रय केंद्र में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। पहले धान तौलने का आश्वासन मिला था। अब अधिकारी लिमिट खत्म होने की बात कहकर टालमटोली कर रहे हैं। वे लिमिट बढ़ने पर ही धान तौलने की बात कह रहे हैं। 20 दिन से धान की वजह से कई काम प्रभावित हुए हैं। गेहूं बुवाई के लिए खेत भी तैयार नहीं हो पा रहा है।
किच्छा मंडी में पड़ा है 500 क्विंटल धान
किसान धान लेकर मंडी में आए हैं। 18 दिन से धान की खरीद नहीं हो पा रही है। अधिकारी लिमिट पूरी होने की बात कहकर धान खरीद से हाथ खड़ा कर रहे हैं। किसान रोजाना धान तौल की आस में क्रय केंद्र आते हैं और शाम को निराश होकर लौट जाते हैं। किसानों के अनुसार किच्छा मंडी में पांच सौ क्विंटल धान पड़ा है।
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10 दिन तक केंद्र में पड़ा रहा धान, हताश होकर व्यापारी को बेचा
पंतनगर विवि के लीज होल्डर दिनेश मंडल का धान बेनी क्रय केंद्र पर 10 दिन तक पड़ा रहा। केंद्र प्रभारी ने लिमिट पूरी होने का हवाला देकर धान तौलने से इनकार कर दिया। इससे निराश दिनेश में अपना 900 क्विंटल धान केंद्र से उठाकर व्यापारी को 1910 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच दिया। लीज होल्डर अनिल कुमार ने लिमिट बढ़ने की आस में खेत से धान कटाई नहीं की है।
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कोट:
दरऊ के किसान समस्या लेकर आए थे। इसकी जानकारी आरएफसी को दे दी है। जैसे ही केंद्र की लिमिट बढ़ेगी धान तौल शुरू हो जाएगी। गौरव पांडे, एसडीएम, किच्छा