हल्द्वानी। जीवनभर दूसरों की जान के लिए सायरन बजाकर एंबुलेंस दौड़ाने वाले मनोज बेलवाल ने संदिग्ध हालात में खंडहर में दम तोड़ दिया। कोरोना काल में जब लोग अपनों को छूने से डर रहते थे, तब सैकड़ों लाशों को कंधा देने वाले चालक के बेजान शरीर को उठाने के लिए किसी के हाथ नहीं बढ़े। आखिरकार जब दुर्गंध असहनीय हो गई तो पुलिस ने पर्यावरण मित्रों को बुलाकर शव को मोर्चरी तक पहुंचाया।
रविवार को रोडवेज स्टेशन में तेज दुर्गंध आने पर यात्रियों का खड़ा होना मुश्किल हो गया। सूचना पर पुलिस पहुंची तो परिसर से लगी तहसील के खंडहर से एक शव बरामद हुआ। अपने चचेरे भाई के साथ पहुंचे प्रेम ने शव की शिनाख्त भाई मनोज बेलवाल (43) के रूप में की।
उन्होंने बताया कि पूर्व में मनोज बेस अस्पताल में एंबुलेंस चालक था। वर्ष 2019-20 में जब कोरोना आया तो मनोज ने अकेले ही महामारी की चपेट में आए सैकड़ों लोगों के शव उठाकर मोक्ष द्वार तक पहुंचाए। आज जब उसके शव को उठाने की बारी आई तो मौके पर जुटी भीड़ तमाशबीन बनी रही। दुर्गंध के कारण कोई भी शव उठाने के लिए तैयार नहीं हुआ। कोतवाल राजेश कुमार यादव ने बताया कि शव को उठाने के लिए पर्यावरण मित्रों को बुलाया गया। सोमवार को शव का पोस्टमार्टम होगा। रिपोर्ट आने पर मौत के कारणों का सही पता चलेगा।
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पत्नी की मौत से अवसाद में चला गया था
मूलरूप से बेतालघाट के रहने वाले मनोज बेलवाल (43) बेस अस्पताल में एक कमरे में रहते थे। पांच वर्ष पहले पत्नी का कैंसर से निधन होने के बाद से वह अवसाद में थे। इस कारण शराब के भी आदी हो गए। उनकी इकलौती बेटी मेरठ में अपने ननिहाल चली गई। पुलिस के अनुसार वर्ष 2022 में मनोज का तबादला हो गया था। लेकिन वह ड्यूटी ज्वाइन करने नहीं गए। तीन साल पहले उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। बेस में मिला कमरा भी छीन लिया गया। इसके बाद वह सड़क पर दिन गुजारने लगे।