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Election: आडवाणी के आगमन पर खुली थी भाजपा की पहली जीत की राह, इस लोकसभा क्षेत्र में एनडी तिवारी का था वर्चस्व

Sat, 30 Mar 2024 01:11 PM IST
हीरा मेहरा अमित उप्रेती, संवाद

सार

उत्तराखंड राज्य बनने से पहले यूपी के समय नैनीताल संयुक्त जिला था। इसका क्षेत्र बहेड़ी तक था और बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र बरेली जिले में जुड़ा था। तब इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा था। पढ़िए आडवाणी और एनडी तिवारी से जुड़ा एक किस्सा...
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एनडी तिवारी - फोटो : डेमो
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विस्तार
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1990-1991 के दौर में राम जन्मभूमि का मुद्दा देशभर में जोर-शोर से छाया था। 1991 के आम चुनाव में नैनीताल-ऊधमसिंह सीट पर चुनावी सभा के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के कदम यहा पड़े और भाजपा को पहली बार इस सीट पर जीत का स्वाद चखने को मिला। तब हिंदुत्व के फायर ब्रांड रहे आडवाणी ने एनडी तिवारी के प्रधानमंत्री बनने के सपने को भी धाराशायी कर दिया। 

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उत्तराखंड राज्य बनने से पहले यूपी के समय नैनीताल संयुक्त जिला था। इसका क्षेत्र बहेड़ी तक था और बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र बरेली जिले में जुड़ा था। तब इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा था। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश तिवारी बताते हैं कि तब आडवाणी ने हल्द्वानी की सभा में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला और कहा था कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता का आडंबर ओढ़े हैं उसे खत्म होना चाहिए।

कहा कि वह पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं कि अयोध्या में अब राम मंदिर निर्माण को बनने से कोई रोक नहीं सकता। उस समय कुमाऊं में भाजपा की रैली अब तक की सबसे बड़ी रैली में गिनी जाती है। उस समय अप्रत्याशित भीड़ ने भाजपा प्रत्याशी पासी के पक्ष में माहौल बना दिया था। भाजपा के बलराज पासी ने इस सीट पर पहली जीत 8500 मतों से दर्ज की थी। 
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तिवारी जी का बड़प्पन
तब देशभर में चर्चा थी कि एनडी तिवारी जीतते तो देश के प्रधानमंत्री बनते। चुनाव हार जाने के बाद एनडी तिवारी ने सार्वजनिक मंचों से भी कहा था कि उन्हें इस बात का मलाल है कि उत्तराखंड से प्रधानमंत्री मिलते-मिलते रह गया। चुनाव हारने के बाद भी एनडी तिवारी के बलराज पासी के साथ मधुर संबंध रहे और चुनाव हारने के बाद उन्हें अपने घर भी बुलाया था। 

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