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लालकुआं के लोगों को मिला जमीनों का मालिकाना हक

Wed, 11 Feb 2015 01:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लालकुआं(नैनीताल)
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लालकुआं के लोगों की भूमि के मालिकाना हक की दशकों पुरानी मांग को आखिरकार कैबिनेट बैठक में हरी झंडी मिल गई। कैबिनेट में पारित प्रस्ताव को 1975 के सर्किल रेट के आधार पर जारी करने पर सहमती मिली है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में लैंड फ्री होल्ड के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई। कैबिनेट के प्रस्ताव की खबर मिलते ही लालकुआं के लोग खुशियां मनाने सड़कों पर आ गए।
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उन्होंने कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल और राजस्व मंत्री यशपाल आर्य का आभार जताया। खुद हरीशचंद्र दुर्गापाल ने कई लोगों को फोन से मालिकाना हक के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की सूचना दी। उन्होंने कहा कि फ्री होल्ड की कार्यवाही के बाद नगर का समग्र विकास संभव हो सकेगा।


नगर पंचायत अध्यक्ष रामबाबू मिश्रा, विधायक प्रतिनिधि भुवन पांडे, ईएसआई डायरेक्टर जीवन कबडवाल, वरिष्ठ कांग्रेसी हरेंद्र बोरा, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कैलाश पंत, पूरन रजवार, कांग्रेस शहर अध्यक्ष गुरूदीप सिंह, ओपी अरोरा, शेखर जोशी समेत अनेकों लोगों ने हर्ष व्यक्त कर राज्य सरकार और हरीश चंद्र दुर्गापाल का आभार व्यक्त किया है।   
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1972 में डी-फारेस्ट हो गया था लालकुआं
सालों पूर्व खत्ते एवं कस्बे के रूप में बसे नगर को तत्कालीन सरकार ने 1972 में डी-फारेस्ट कर दिया था। देश की आजादी के बाद लोगों ने राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग उठाई। 23 दिसंबर 1975 को लालकुआं को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला, लेकिन पर्याप्त राजस्व अभिलेख न होने से 1978 में नगर के सर्वेक्षण एवं अभिलेखन की कार्यवाही नहीं हो सकी। लालकुआं को 30 दिसंबर 1978 को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ। लेकिन कस्बे का गजट नोटिफिकेशन न होने से भूमि का मालिकाना हक नही मिल सका।

लिहाजा यह तय नहीं हो पाया कि कस्बे की भूमि को किस श्रेणी में रखा जाए। नगर की भूमि खाम श्रेणी में दर्ज थी। अभिलेखों के अनुसार कुछ लोगों को पूर्व में यहां पट्टे भी आवंटित हुए। लेकिन सरकारी हीलाहवाली के चलते लोगों को भूमि का मालिकाना हक नही मिल सका था।
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