ज्योलीकोट (नैनीताल)। वीरभट्टी पुल पर गैस वाहन हादसे को पूरा एक महीना हो गया, लेकिन पुल को अब तक यातायात के लिए नहीं खोला जा सका। केंद्र और प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने के बाद भी लाइफ लाइन माने जाने वाले इस मार्ग पर इतना लंबा ‘ब्रेक’ एनएच विभाग और शासन प्रशासन की काहिली को बयां करता है। एक माह से बंद मार्ग से तीन ग्राम सभाओं के लोगों के साथ स्कूली बच्चे, नौकरीपेशा, काश्तकार सभी परेशान हैं। वहीं भीमताल मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने से यात्रियों, पर्यटकों और वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
25 सितंबर की दोपहर को हल्दूचौड़ से कपकोट को 234 एलपीजी सिलेंडर लेकर जा रहे ट्रक में आग लगने के बाद 80 से ज्यादा सिलेंडरों के विस्फोट से पूरा इलाका थर्रा उठा था। विस्फोटों से 100 साल पुराने ब्रिटिशकालीन पुल को नुकसान पहुंचा था। एनएच के चीफ इंजीनियर कुमाऊं एजाज अहमद ने पुल की मजबूती की जांच आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों से करवाने की बात कही थी। संभावित खतरे को देखते हुए एक सप्ताह के लिए एनएच पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी। लेकिन हादसे के दस दिन बाद बमुश्किल आईआईटी रुड़की से आये विशेषज्ञ प्रो.संजय किरमानी ने पुल का जायजा लिया और एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने की बात कही थी। अब एक माह बीत जाने के बाद भी इस मार्ग पर यातायात सुचारु नहीं हो सका है।
मरम्मत कार्य मजदूरों के भरोसे छोड़ा
ज्योलीकोट (नैनीताल)। स्थानीय निवासी और बलियानाला संघर्ष समिति के सचिव इंदर नेगी ने मरम्मत कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि पुल की मरम्मत का कार्य वेल्डिंग में लगे कारीगरों के भरोसे छोड़ दिया गया है। विभाग का कोई तकनीकी विशेषज्ञ या कर्मचारी मौजूद नहीं रहता है। इससे ब्रिटिशकालीन इस पुल की मजबूती खतरे में पड़ सकती है।
मरम्मत के चलते दुपहिया वाहन चालक परेशान
ज्योलीकोट (नैनीताल)। पुल में मरम्मत कार्य के दौरान कारीगरों को दिक्कत न हो इसके लिए पुल को लोहे के पाइप लगा अवरोधित किया गया है, लेकिन दुपहिया चालकों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से वाहन निकालने में पसीने छूट जा रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश है। सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र पाठक, धीरज सिंह, पुष्कर जोशी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर आक्रोश जताते हुए दुपहिया चालकों के लिए उचित व्यवस्था की मांग की है।