कुमाऊं में वन्यजीव हिंसक हो गए हैं। वन्यजीवों के हमले से पूरा मंडल दहल रहा है। इस सर्दी में मंडल के अलग-अलग जिलों में बाघ और तेंदुओं के हमले में अब तक 10 लोगों की असमय मौत हो गई है। कई गांवों में शाम होते ही कर्फ्यू जैसा माहौल बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों के लोग खौफ के साये में जी रहे हैं। शाम होते ही लोग घरों में दुबकने के लिए विवश हो रहे हैं।
पिछले वर्षों के दौरान कुमाऊं मंडल के पर्वतीय अंचलों में निर्माण कार्यों के नाम पर बेतरतीब तरीके से जंगलों का सफाया हुआ है। पर्यटन के नाम पर जंगलों के भीतर तक लोगों की आवाजाही बढ़ी है। जंगलों में पानी और भोजन की कमी भी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में तेंदुए, बाघ और भालू आबादी क्षेत्रों तक पहुंचने लगे हैं। इसके चलते मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और लोगों को असमय मौत का सामना करना पड़ रहा है।
- 31 दिसंबर 2025 में अल्मोड़ा के जोरासी रेंज में बाघिन के हमले में बचुली देवी की मौत
-02 जनवरी 2026 को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेंज के जंगल में बाघ के हमले में लकड़ी बीनने गई सुखिया देवी की मौत
- 04 जनवरी 2026 को बाघ के हमले में पटकोट भलौन में एक श्रमिक की मौत
- 07 जनवरी को बागेश्वर के मनकोट गांव में वन्य जीव के हमले में देवकी देवी की मौत
- 11 जनवरी 2026 को धारी ब्लॉक में तेंदुए के हमले में गंगा देवी की मौत
- 12 जनवरी 2026 खटीमा के बग्गा चौवन गांव में बाघ के हमले में शेर सिंह कन्याल की मौत
भालू के हमले में घायल हुआ था युवक
कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में बाघ और तेंदुओं का ही नहीं बल्कि भालुओं का भी आतंक गहराता जा रहा है। 21 नवंबर 2025 को पिथौरागढ जिले के धारचूला के जयकोट में भालू के हमले में नरेंद्र नामक युवक घायल हो गया था। जिसे प्राथमिक इलाज के बाद हल्द्वानी रैफर किया गया था।
मानव वन्य जीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं चुनौती हैं। इससे निपटने के लिए विभाग हर संभव कदम उठा रहा है। ग्रामीणों का जागरूक होना भी जरूरी है। गांवों में विभिन्न वन प्रभागों की ओर से जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। सभी डीएफओ को निर्देश हैं कि वह गश्त तेज कराएं। -रंजन कुमार मिश्रा पीपीसीएफ हॉफ