डेयरी निदेशालय भवन बनाने को कितनी भूमि चाहिए, यह खुद दुग्ध मंत्रालय को ही नहीं पता। पहले तो डेयरी निदेशालय के लिए तीन हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत बताई। इसके लिए प्रस्ताव आदि भी तैयार कर लिया। बाद में अचानक अधिकारियों का लगा, कि यह जमीन तो ज्यादा मिल रही है, तो विभाग ने पुरानी सभी मेहनत, तैयारियों पर पानी फेर दिया। अब नए सिरे से कम भूमि का प्रस्ताव तैयार कर वन भूमि मांगने की तैयारी है।
उत्तराखंड मुक्त विवि के पास डेयरी निदेशालय के लिए तीन हेक्टेयर वन भूमि की मांग करीब दो साल पहले की गई। निदेशालय के अधिकारियों ने सर्वे, प्रशासन से लेकर वन विभाग के कार्यालयों की दौड़, नक्शा लगाना, प्रोजेक्ट के प्रस्ताव की कापी आदि तैयार कर जमीन की मांग तराई केंद्रीय वन प्रभाग से की। विभाग भी जमीन देने को तैयार हो गया, पर अचानक अफसरों को लगा कि सवा हेक्टेयर जमीन ज्यादा है, तो उसे कम कर अब 1.75 हेक्टेयर कर दिया गया।
अब नए सिरे से वही सभी औपचारिकता जो पहले में की गई थी, पूरी की जा रही। जंगलात में वन भूमि की फाइल हल्द्वानी, नैनीताल, देहरादून होते हुए केंद्रीय मंत्रालय तक जाती है, इतने चरण और प्रक्रिया पूरी होते हुए काफी समय लगने की संभावना है। ऐसे में योजना अफसरों के रवैये के चलते पीछे हो गई।