वीकेंड के साथ आम दिनों में लगने वाला जाम अब जानलेवा बनने पर उतारू है। नैनीताल जिले में हर तरफ जाम का हाल यह है कि कहीं से भी पहाड़ जाना हो या फिर पहाड़ से मैदान की तरफ आना हो, जाम से सामना किए बगैर सफर पूरा नहीं हो सकता है। ऐसे में पहाड़ से गंभीर हालत में मरीजों को हल्द्वानी लाना अब एक चुनौती बन गया है।
अल्मोड़ा से आने वाले वाहनों का कैंची की तरफ से आना मजबूरी है। कैंची से न आने पर अगर वाहन रामगढ़ की तरफ से आते हैं तो भी उन्हें भवाली से आगे भीमताल से रानीबाग तक जाम ही झेलना है। यही हाल रानीखेत की तरफ से मैदान आने वाले वाहनों का है। यहां से आने
वाले लोगों को हर हाल में कैंची, भवाली, भीमताल, रानीबाग के जाम का सामना करना ही है। पिथौरागढ़ के वाहन अगर धानाचूली होते हुए हल्द्वानी की तरफ आते हैं तो खुटानी के बाद भीमताल में प्रवेश करते ही जाम उन्हें परेशान करने के लिए तैयार रहता है।
अब यही जाम जनता की जान के लिए आफत बनता जा रहा है, जैसा कि रविवार को सुयालवाड़ी से हल्द्वानी आने वाले मरीज के साथ हुआ। परिणाम यह हुआ कि जब मरीज हल्द्वानी स्थित उजाला सिग्नल अस्पताल पहुंचा, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। पहाड़ों से गंभीर स्थिति में मरीजों को हल्द्वानी लाने के लिए सिवाय कोई और चारा भी नहीं है। ऐसे में इस समय पीक सीजन में यह जाम जान के लिए गंभीर मुश्किल बनता जा रहा है। चार दिन पहले भी पहाड़ से हल्द्वानी की ओर आ रही एंबुलेंस जाम में करीब एक घंटे तक फंसी रही। अब रविवार को मरीज की चली जाने के बाद जाम की यह समस्या गंभीर सवाल खड़ा कर रही है।