बेस अस्पताल में फर्जी नेत्र सर्जन बनकर मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए खिलाड़ियों से वसूली करना एक युवक को महंगा पड़ गया। शक होने पर खिलाड़ियों ने उसे दबोचकर पुलिस के हवाले कर दिया। हालांकि माफी मांग लेने पर पुलिस और अस्पताल प्रबंधन भी उस पर मेहरबान हो गया। बिना कार्रवाई के उसे छोड़ दिया गया।
स्टेडियम के खिलाड़ी मेडिकल बनाने के लिए शुक्रवार को बेस अस्पताल पहुंचे। इस बीच एक युवक उनके पास पहुंचा और खुद को बेस अस्पताल में नेत्र सर्जन बताने लगा। जब खिलाड़ियों ने मेडिकल बनाने के लिए कहा तो हर खिलाड़ी से 150-150 रुपये की डिमांड की गई। खिलाड़ी उसकी बातों में आ गए। वह मेडिकल सर्टिफिकेट बना ही रहा था इस बीच एक खिलाड़ी को शक हो गया। उसने युवक से आई टेस्ट के बारे में पूछा तो वह सकपका गया। नाम पूछने पर इधर-उधर की बातें करने लगा।
इस पर खिलाड़ियों ने उसे पकड़ कर अस्पताल में तैनात पीआरडी दरोगा को सौंप दिया। पीआरडी जवान आरोपी को लेकर कोतवाली पहुुंचे। पुलिस ने पूछताछ की तो युवक ने अपना नाम आसिफ रहमान पुत्र शकील रहमान निवासी गली नंबर पांच मुखानी बताया। जब पुलिस ने खिलाड़ियों के आरोपों के बारे में पूछा तो वह खुद को मरीज बताने लगा लेकिन ओपीडी के पर्चा मांगने पर बगले झांकने लगा। बाद में आसिफ के पिता भी कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने उसे छोड़ देने की गुहार लगाई। कोतवाल आरएस मेहता ने बताया कि आरोपी ने अस्पताल प्रबंधन से माफी मांग ली थी। उसके खिलाफ किसी ने लिखित शिकायत भी नहीं की इसलिए छोड़ दिया गया।