अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने उत्तराखंड के 27 संगठनात्मक जिलों में पर्यवेक्षक नियुक्त कर उन्हें 26 नवंबर तक अभियान की निगरानी का जिम्मा सौंपा है। राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष और सचिव को जिम्मेदारी सौंपी है। पर्यवेक्षकों को जिला कांग्रेस कमेटियों, ब्लॉक अध्यक्षों, बूथ लेवल एजेंटों और फ्रंटल संगठनों के साथ समन्वय बनाकर काम करना है। अब तक प्रदेश स्तर पर तय होने वाली राजनीतिक गतिविधियों को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने और उनकी नियमित समीक्षा करने पर भी जोर है।
वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के मुताबिक इस यात्रा से सरकार ने जो वायदे किए थे, उनके फेलियर को उजागर करेंगे। प्रदेश में नौ हजार स्कूल बंद कर दिए, बिजली आ नहीं रही, टैरिफ बढ़ रहा है। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं है। बेरोजगारी बढ़ी है।
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प्रदर्शन से आगे, अब बूथ पर पहुंचने की चुनौती
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन को लगातार चलाने के साथ उसे संगठन की सक्रियता में बदलने की है। अभी कांग्रेस तीन न्याय यात्राएं निकाल रही है जिसमें एक यात्रा यशपाल आर्य और पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में कुमाऊं में, दूसरी पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह आदि के नेतृत्व में टिहरी, गढ़वाल में और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में देहरादून से बद्रीनाथ तक निकल रही है। 25 अक्तूबर से 25 नवंबर तक गांवों में चौपालें आयोजित की जाएंगी। इससे पार्टी को मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने और स्थानीय समस्याओं को समझने का अवसर मिलेगा।
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जिला और विधानसभा प्रभारियों को भी जिम्मेदारी
प्रदेश संगठन ने जिला, विधानसभा क्षेत्र और विभिन्न विभागों व प्रकोष्ठों के लिए पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने का उद्देश्य संगठन को चुनाव से पहले सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाना है।
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एक नवंबर की महारैली से दिल्ली तक उठेगा मुद्दा
कांग्रेस चौपालों के बीच एक नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित महारैली में भी भागीदारी की तैयारी कर रही है। वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक दिल्ली के रामलीला मैदान में एक लाख लोग पहुंचेंगे। जिसमें उत्तराखंड से जिला और ब्लॉक इकाईयों के पदाधिकारी करीब पांच हजार लोग जा रहे हैं।