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Nainital News: मुंशी प्रेमचंद की 'विरासत' को चट कर गई दीमक

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हल्द्वानी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नैनीताल जिले के दुर्गम इलाकों में संचालित घोड़ा लाइब्रेरी की सराहना की है। यह लाइब्रेरी दूर-दराज के गांवों के बच्चों में पढ़ने की रुचि जगा रही है। वहीं, शहरों के पुस्तकालय और वाचनालय बदहाली के आंसू बहा रहे हैं। सड़ी-गली अल्मारियां धूल फांक रही हैं। प्रेमचंद के अमूल्य साहित्य को दीमक चट कर गईं। यही हाल उर्दू अदब के मशहूर शायर अल्ताफ हुसैन हाली, अहमद फराज, फिराक गोरखपुरी के मजमूओं का भी है।

किसी जमाने में हल्द्वानी और काठगोदाम क्षेत्र में चार पुस्तकालय और वाचनालय संचालित थे। अब रोडवेज बस स्टेशन के पास सिर्फ नाम का पुस्तकालय है जबकि ताज चौराहे के पास स्थित मौलाना हकीमुल्ला नगर निगम पुस्तकालय का भवन तोड़ दिया गया। नगर निगम बालक इंटर कॉलेज में कामचलाऊ व्यवस्था के तहत वाचनालय शिफ्ट किया गया है।
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2008 में शिफ्ट हुआ था मौलाना हकीमुल्ला पुस्तकालय

बनभूलपुरा में ताज चौराहे के पास 1987 में बने पुस्तकालय में बुजुर्ग और युवा पढ़ने आते थे। 2008 में पुस्तकालय के स्थान पर दोमंजिला कॉंप्लेक्स बनाने की बात करते हुए भवन तोड़ दिया, लेकिन 15 साल बाद भी लाइब्रेरी नहीं बनी। निगम ने चोरगलिया रोड पर व्यावसायिक भवन की ऊपरी मंजिल पर बने छोटे से कमरे में लाइब्र्रेरी शिफ्ट कर दी गई। पुरानी बाल पुस्तिकाएं, मैगजीन और प्रतियोगी किताबें अलमारी में बंद हैं। कमरे में धूल से पटे अखबार दिखाई देते हैं। पुस्तकालय के भवन निर्माण के लिए क्षेत्रीय पार्षद कई बार नगर निगम की बैठक में आवाज उठा चुके हैं।


1953 में बना था पं. गोविंद बल्लभ पंत पुस्तकालय



रोडवेज बस अड्डे के पास 1953 में बना पं. गोविंद बल्लभ पंत पुस्तकालय भी बदहाल है। पुस्तकालय के एक कमरे में पुराने अखबारों की रद्दियां रखी हैं जो धूल से पटी हैं। 2000 से अधिक पुरानी किताबें ताले में बंद हैं।

2013 से बंद है काठगोदाम का पुस्तकालय काठगोदाम में नरीमन चौराहे के पास किराये के भवन में चलने वाली लाइब्रेरी 2013 में बंद हो गई थी। इसे नगर निगम बालक इंटर कॉलेज में शिफ्ट किया गया था लेकिन संसाधनों के अभाव में छात्र यहां का रुख नहीं करते।


रानीबाग में पांच साल से बंद है पुस्तकालय

रानीबाग का पुस्तकालय भी पांच साल से बंद पड़ा है। रानीबाग में पुस्तकालय के पुराने भवन की मरम्मत कर इसे फिर से संचालित किया जा सकता है।


एमबीपीजी कॉलेज के वाचनालय में छात्रों की रहती है भीड़
एमबीपीजी कॉलेज के वाचनालय में करीब 70 छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए जगह है। यहां लाइब्रेरी खुलने पर विद्यार्थियों की भीड़ रहती है। जगह कम पड़ने के कारण छात्रों को कभी-कभार सीट नहीं मिलती। वहीं महिला महाविद्यालय में स्थित वाचनालय में आठ से 10 छात्राओं के बैठने के लिए जगह है।



लंबे समय से लाइब्रेरी के निर्माण की मांग उठा रहे हैं। लाइब्रेरी की जमीन खाली पड़ी है लेकिन इसका क्षेत्र के हित में उपयोग नहीं किया जा रहा है। क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। लाइब्रेरी का निर्माण जल्द किया जाए।
-फईम जेबा सलमानी, पार्षद, इंदिरानगर

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बोर्ड की बैठक में क्षेत्र के सभी पार्षदों ने मौलाना हकीमुल्ला लाइब्रेरी के निर्माण का मामला उठाया था। लंबे समय से लड़ाई कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। लाइब्रेरी निर्माण के लिए सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो कोर्ट से गुहार लगाई जाएगी।



गुफरान, पार्षद, आजाद नगर।



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छात्र कर रहे निजी लाइब्रेरी का रुख

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। हल्द्वानी शहर में लाइब्रेरी की उचित व्यवस्था नहीं है। लाइब्रेरी में ना तो किताबें हैं और ना ही अन्य सुविधाएं। इसलिए प्राइवेट लाइब्रेरी में पढ़ने आते हैं।



- दिनेश उपाध्याय, छात्र।





निजी पुस्तकालय में फीस अधिक है, लेकिन यहां पढ़ाई का माहौल मिलता है। जरूरी किताबें भी मिल जाती हैं। सरकारी पुस्तकालयों में अपनी ही किताबें लेकर जाना पड़ता है। वहां पढ़ाई का माहौल भी नहीं मिलता।

निशा गड़कोटी, छात्रा







कोट-



पुस्तकालयों और वाचनालयों के लिए बजट स्वीकृत हो गया है। जल्द ही नगर निगम के सभी पुस्तकालयों और वाचनालयों का पुनरुद्धार किया जाएगा।

-पंकज उपाध्याय, नगर आयुक्त, नगर निगम।

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फोटो -=- दुर्गम गांवों में बाल पुस्तकें पहुंचा रहा झोला पुस्तकालय

हल्द्वानी। बच्चों में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में एक से बढ़कर एक अनूठी पहल की जा रही है। पिथौरागढ़ जिले के राजकीय इंटर कॉलेज देवलथल के शिक्षक महेश पुनेठा पिछले पांच साल से झोला पुस्तकालय का संचालन कर रहे हैं। ये पहल सीमांत जिले पिथौरागढ़ से शुरू होकर अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल जिले में भी शुरू हो गई है।
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50 से बाल पुस्तकों का सेट झोले में रखकर दुर्गम गांवों के बच्चों तक पहुंचाया जाता है। जब बच्चे किताबें पढ़ लेते हैं तो उन्हें दूसरा झोला भेजा जाता है।



इस पहल से प्रेरित होकर पिथौरागढ़ में रघुनंदन राकेश, अल्मोड़ा में ज्योति भट्ट, बागेश्वर में शैलेंद्र धपोला और केवलानंद मठपाल, नैनीताल के काकड़ीघाट (गरमपानी) में दीपक रावत मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।
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