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Nainital News: अब शिक्षकों का होगा मूल्यांकन, खराब प्रदर्शन पर 50 से ऊपर की उम्र में अनिवार्य सेवानिवृत्ति

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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय की सोमवार को कार्यपरिषद की बैठक में शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए 100 अंकों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली और खराब प्रदर्शन पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसे निर्णय लिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक पारदर्शी ढांचा तैयार किया है जिसे देश के किसी भी विश्वविद्यालय में लागू होने वाली अपनी तरह की पहली प्रणाली माना जा रहा है।
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इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों की कार्यकुशलता को केवल उनके अनुभव से नहीं बल्कि वास्तविक आउटपुट से मापा जाएगा। स्कोरकार्ड में शिक्षण, शोध प्रकाशन, पीएचडी पर्यवेक्षण, शोध परियोजनाएं और प्रशासनिक उत्तरदायित्वों को शामिल किया गया है। शोध की गुणवत्ता बनाने के लिए केवल स्कोपस और वेब ऑफ साइंस जैसे वैश्विक डेटाबेस में प्रकाशित शोध पत्रों को ही मान्यता दी जाएगी। शिक्षण कार्यों में पाठ्य सामग्री निर्माण और छात्रों से मिलने वाले फीडबैक को विशेष वेटेज दिया गया है। सबसे सख्त निर्णय के अनुसार, 50 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके ऐसे शिक्षक जिनका प्रदर्शन लगातार खराब पाया जाएगा, उन्हें शासनादेश (एफआर56-जे) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकेगी। यहीं नहीं कार्यपरिषद ने शोध की गुणवत्ता सुधारने के लिए फर्जी पत्रिकाओं पर रोक लगा दी है। बील्स लिस्ट या संदिग्ध मेट्रिक्स वाले जर्नल अब स्वतः अस्वीकृत होंगे। इसके साथ ही डीएससी और डीलिट जैसी उच्च उपाधियों के लिए 12 वर्ष का अनुभव और विशिष्ट शोध प्रदर्शन अनिवार्य कर दिया गया है।



अच्छे अंकों वाले शिक्षकों को मिलेगा सम्मान

नई व्यवस्था के तहत 75 फीसदी से अधिक अंक पाने वाले शिक्षकों को प्रशंसा पत्र मिलेगा। वहीं 60 से 75 फीसदी अंक लाने वालों को सुधार के लिए दो वर्ष और 60 फीसदी से कम अंक वालों को तीन वर्ष का समय दिया जाएगा। इस अवधि में सुधार न होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान है। संविदा शिक्षकों के लिए 60 फीसदी से कम स्कोर होने पर अनुबंध नवीनीकरण नहीं होगा। मूल्यांकन में शोध, पीएचडी और प्रशासनिक कार्यों को भी वेटेज दिया गया है। साथ ही, शिक्षकों के लिए राज्य के बाहर सम्मेलन में कम से कम एक प्रस्तुति देना अनिवार्य होगा। साथ ही विज्ञान एवं तकनीकी शोधार्थियों को स्कोपस और वेब ऑफ साइंस इंडेक्स्ड जर्नलों में ही शोध पत्र प्रकाशित करने होंगे। कला और सामाजिक विज्ञान विषयों के लिए विश्वविद्यालय की ओर से अनुमोदित और प्रतिष्ठित संस्थानों के जर्नलों को भी मान्यता दी गई है।
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ये नियम होंगे

नए नियमों के तहत विज्ञान संकाय के शिक्षकों के लिए 25 शोध पत्र, औसत इंपैक्ट फैक्टर 2.0 और 20 का एच-इनडैक्श अनिवार्य होगा। मानविकी एवं वाणिज्य विषयों के लिए 12 शोध पत्र या 8 शोध पत्र के साथ एक स्तरीय पुस्तक आवश्यक है। हिंदी जैसे विषयों के लिए विश्वविद्यालय की सूचीबद्ध पत्रिकाओं में 12 पेपर और एक पुस्तक का प्रकाशन अनिवार्य किया गया है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पुस्तक प्रकाशन के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बैठक में सात शिक्षकों की पदोन्नति को भी मंजूरी दी गई।



कार्यपरिषद के निर्णय विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन सुधारों से न केवल शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि संस्थान की वैश्विक प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।
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- प्रो. दीवान एस. रावत, कुलपति, कुमाऊं विश्वविद्यालय



फोटो- 23एनटीएल07पी
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