शिक्षा विभाग जैसे जिम्मेदार महकमे की लापरवाही का नजारा राजकीय प्राथमिक विद्यालय बंगाली कॉलोनी में देखने को मिला। यहां हेड टीचर के अलावा अन्य चार टीचर कक्षा कक्षों में ताला लगाकर अपने घरों को चलते बने और नौ मासूम कमरे में कैद हो गए। बच्चों की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग एकत्र होने पर आननफानन में भोजनमाता को बुलाया गया और ताला खोलकर बच्चों को बाहर निकाला गया।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार को राजकीय प्राथमिक स्कूल बंगाली कॉलोनी में छुट्टी के समय सभी बच्चे घर चले गए थे। स्कूल के ऊपरी भवन में कक्षा चार के बच्चे पढ़ रहे थे। छुट्टी होने पर स्कूली बच्चों और टीचरों के बाद ताला लगा दिया गया। लेकिन, ऊपरी मंजिल के कमरे में नौ बच्चे छूट गए। थोड़ी देर बाद जब बच्चे नीचे आए तो देखा स्कूल बंद हो चुका है और वह अंदर ही रह गए हैं तो उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें शांत किया।
लोगों ने मामले की सूचना हेड टीचर को दी। तब तक मौके पर भोजनमाता को भी बुला लिया गया। भोजनमाता के पास भी स्कूल की चाभी थी और उन्होंने ताले खोलकर बच्चों को बाहर निकाला। घटना से लोगों में रोष देखा गया। इस दौरान अभिभावकों ने जमकर हंगामा काटा तथा दोषी शिक्षकों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। इधर, बीएसए डॉ. भौर्याल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि घटना की बारीकी से जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
मामला संज्ञान में आया है। घटना की उच्च स्तरीय जांच कर सख्त कार्यवाई की जाएगी।
- रघुनाथ लाल आर्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी।
मामले में खंड शिक्षा अधिकारी से बात कर पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लेंगे जो बच्चे विद्यालय के भीतर बंद हुए थे। यदि उनके अभिभावक शिकायती पत्र देंगे तो विद्यालय स्टाफ के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पंकज उपाध्याय, एसडीएम।
हां हमसे गलती हुई है, लेकिन यह घटनाक्रम 45 मिनट तक चला यह सरासर गलत है, महज 10 से 15 मिनट के भीतर ही बच्चों को ताला खोलकर बाहर निकाल लिया गया था। भोजनमाता जब ताला खोलने पहुंची तो कुछ लोगों ने मामले को तूल देकर उसे ताला खोलने से मना किया और धमकी भी दी, जो कि गलत है। बच्चों के अभिभावकों को भी मामले में कोई शिकायत नहीं है। स्टाफ के सभी शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास है।
- अर्चना वर्मा, हेड टीचर, राजकीय प्राथमिक स्कूल, बंगाली कॉलोनी।