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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिए आदेश, कहा- अवैध निर्माण के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें

Fri, 07 Jan 2022 05:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल

सार

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष देहरादून निवासी अनु पंत की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
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नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव वन एवं प्रमुख सचिव पर्यावरण को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के मोरघट्टि, पाखरो क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण के मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष देहरादून निवासी अनु पंत की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की ओर से भी मामले में स्वत: संज्ञान लिया गया था। अनु पंत ने कहा था कि जिस अधिकारी को उत्तर प्रदेश शासन ने 1999 में विजिलेंस रिपोर्ट में दोषी पाया था उस पर जंगली जानवरों की खाल की खरीद फरोख्त जैसे गंभीर अपराधों की पुष्टि हुई थी।

उसी प्रभागीय वन अधिकारी किशन चंद को कालागढ़, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व जैसे अति संवेदनशील स्थान में तैनाती दी गई। जब कॉर्बेट में अवैध निर्माण की गतिविधियां शुरू हुईं और राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण ने जांच रिपोर्ट तैयार की तब उसमें भी वन प्रभागीय अधिकारी किशन चंद को अवैध निर्माण के लिए दोषी पाया गया। उसके बाद हाईकोर्ट के दिशा निर्देश में उच्चस्तरीय समिति गठित हुई।
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समिति और वन विभाग के विभागाध्यक्ष राजीव भरतरी की अध्यक्षता में एक और रिपोर्ट में भी किशन चंद को गड़बड़ी का दोषी पाया गया लेकिन तत्कालीन मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने किशन चंद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट में रिपोर्ट दाखिल होने के बाद तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी को शासन ने पद से हटा दिया। शासन ने 25 नवंबर को किशन चंद के स्थानांतरण के आदेश दिए थे लेकिन आदेशों का कभी पालन नहीं हुआ। किशन चंद ने आज की तिथि तक दूसरे अधिकारी को चार्ज नहीं सौंपा।

हाईकोर्ट ने पूछा की जांच के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरीके से स्थानांतरण किस आधार पर किया गया। कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव वन और प्रमुख सचिव पर्यावरण को इस गड़बड़ी में दोषी पाए गए अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने और चार्ज हैंडओवर सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 फरवरी की तिथि नियत की है।

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