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नैनीताल: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय पर लगाई मुहर, कहा- आयुष और एलोपैथिक डॉक्टर समान वेतन के हकदार

Fri, 25 Mar 2022 10:32 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल

सार

नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर लगाई है और उत्तराखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आयुष और एलोपैथिक डॉक्टर समान वेतन के हकदार हैं। कोर्ट के इस निर्णय से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नियुक्त करीब 300 आयुष चिकित्सक लाभान्वित होंगे। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयुष और एलोपैथिक डॉक्टर, दोनों ही समान वेतन के हकदार हैं। राज्य सरकार इनमें भेदभाव नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए उत्तराखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नियुक्त करीब 300 आयुष चिकित्सक लाभान्वित होंगे।

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राज्य सरकार ने 2012 में एलोपैथिक और आयुष डॉक्टरों को 25 हजार मासिक मानदेय के साथ पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के अनुबंध पर चिकित्सा अधिकारी के रूप में नियुक्त किया था। बाद में सरकार ने एलोपैथिक डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया, लेकिन आयुष चिकित्सकों के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की। हाईकोर्ट ने आयुष डॉक्टरों को भी एलोपैथिक डॉक्टरों के बराबर वेतन देने के निर्देश दिए थे लेकिन सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी।
 

यह है मामला

नैनीताल जिले के मोटाहल्दू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात आयुष चिकित्सक संजय सिंह ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के निर्णय को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि दोनों तरह के चिकित्सक समान वेतन के हकदार हैं। वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने दोनों चिकित्सकों को समान वेतन देने के आदेश दिए। इस निर्णय को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर चुनौती दी।

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सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आयुष चिकित्सकों के अधिवक्ता डा. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने तर्क दिया कि आयुष व एलोपैथिक चिकित्सकों की नियुक्ति मेडिकल अफसर के रूप में हुई है। नियुक्ति की विज्ञप्ति में यह साफ किया गया था। वहीं राज्य सरकार ने कहा कि दोनों चिकित्सक अलग-अलग तरह का इलाज करते हैं। एलोपैथिक चिकित्सकों का काम अधिक गंभीर व महत्वपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विनीत सरन व जस्टिस माहेश्वरी की संयुक्त पीठ ने राज्य सरकार के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि दोनों चिकित्सक मरीजों का इलाज अपनी-अपनी विधि से करते हैं। राज्य सरकार उनके बीच अंतर नहीं कर सकती। उपचार के आधार पर भेदभाव अनुच्छेद - 14 का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की एसएलपी को खारिज कर एलोपैथिक व आयुष चिकित्सकों को समान वेतन देने के नैनीताल हाई कोर्ट के निर्णय को सही करार दिया।

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