हल्द्वानी। दूषित खाना और पानी बच्चों को लिवर से जुड़ी बीमारी (हेपेटाइटिस) दे रहा है। मेडिकल कॉलेज में डेढ़ साल में 128 मामले आए हैं, जिसमें बच्चों में लिवर में इंफेक्शन की शिकायत थी। इसमें से अधिकांश मामले हेपेटाइटिस (ए और ई) के हैं, जो दूषित खाने और पानी से होता है।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग ने बच्चों में लिवर इंफेक्शन के कारणों को जानने को लेकर अध्ययन किया था। बाल रोग विभाग की एसो. प्रोफेसर डॉ. ऋतु रखोलिया कहती हैं कि 18 महीनों में लिवर संक्रमण को लेकर जो बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए थे, उनकी केस हिस्ट्री और कारणों को जानने का प्रयास किया गया। इसमें बच्चों की उम्र 2 वर्ष से 15 वर्ष की थी। इसमें देखा गया कि सबसे ज्यादा इंफेक्शन का अनुपात दूषित खाने और पानी से फैलने वाले विषाणु (हेपेटाइटिस ए और ई) से था, जो की पूरे इंफेक्शन का करीब 83 प्रतिशत था। रक्त से फैलने वाले हेपेटाइटिस का अनुपात लगभग पांच प्रतिशत पाया गया। बाकी करीब 12 प्रतिशत संक्रमण का कारण अलग-अलग विषाणुओं के मिश्रित संक्रमण से पाया गया है।
मृत्यु के अधिकतम कारण के लिए हेपेटाइटिस ए
हल्द्वानी। डॉ. रखोलिया कहती हैं कि अध्ययन में देखा गया कि कुल मृत्यु के कारणों में अधिकतम मामले हेपेटाइटिस ए (लगभग 70 प्रतिशत) के पाए गए। इसके बाद 23 प्रतिशत मृत्यु मिश्रित संक्रमण के कारण पाई गई और करीब आठ प्रतिशत हेपेटाइटिस बी के कारण पाए गए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार इनमें भी कई केस ऐसे थे, जो इलाज के लिए अस्पताल में देर से पहुंचे। यह माना जाता था कि केवल बरसात में ज्यादा केस आते हैं, लेकिन यह देखा गया कि यह केस साल भर तक आए हैं।
दो से चार सप्ताह में बीमारी ठीक
हल्द्वानी। चिकित्सकों के अनुसार जब हमने इन संक्रमित बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज करने के बाद आगे भी ओपीडी में फॉलोअप किया तो इनमें लिवर इंफेक्शन के कारण भूख न लगना, पेशाब का पीला होना आदि दिक्कतें करीब दो से चार हफ्तों में ठीक हो गई। जबकि खून में बढ़े हुए पीलिया को ठीक होने में आठ से 12 हफ्ते तक भी लगे हैं।
ज्ञात हो कि लिवर में होने वाला संक्रमण दो प्रकार से फैलता है। इसमें दूषित खाना या पानी से (हेपेटाइटिस ए और ई) और खून के द्वारा (हेपटाइटिस बी और सी) होता है।
लक्षण
- पेट दर्द और उल्टी
- भूख न लगना और बुखार
- पेशाब का पीला होना और कमजोरी
बचाव
- हेपेटाइटिस ए और बी का टीकाकरण
- बाहर खास तौर पर कच्चा खाना आदि से बचे
- पानी उबाल कर या फिल्टर का पीना चाहिए
- हाथ धोकर खाना खाएं
- घर में खाना बनाते समय साफ-सफाई का रखें ध्यान
- दिक्कत होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें