नैनीताल। विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई की जांच के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई हुई। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि सीएफएसएल की रिपोर्ट की पुष्टि के लिए भारत सरकार स्टिंग सीडी की जांच दोबारा करा रही है।
याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सीबीआई को आदेशित किया है कि प्रारंभिक जांच के बाद यदि एफआईआर दर्ज करने की स्थिति होती है तो उससे पूर्व कोर्ट को सूचित करना होगा। कोर्ट के पूछने पर सीबीआई ने बताया कि हरीश रावत जांच में सहयोग कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 जुलाई को होगी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाईकोर्ट ने याचिका दायर कर सीबीआई की ओर से स्टिंग ऑपरेशन प्रकरण में प्रारंभिक जांच किए जाने को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की थी। याचिका के मुताबिक सरकार अब अस्तित्व में है और स्टिंग आपरेशन मामले की जांच करने में राज्य पुुलिस सक्षम है। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि राज्य कैबिनेट की बैठक में सीबीआई जांच की संस्तुति वापस लेने का निर्णय लिया जा चुका है।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष सीबीआई की ओर से राकेश थपलियाल व संदीप टंडन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भारत सरकार ने स्टिंग सीडी की सीएफएसएल की रिपोर्ट की पुष्टि के लिए संबंधित सीडी की पुन: जांच कराने के लिए भेजा है। रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। इस दौरान कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि अभी तक की गई प्रारंभिक जांच में क्या सीबीआई को साक्ष्य मिले, जिसका सीबीआई कोई जवाब नहीं दे पाई।
कोर्ट ने सीबीआई से यह भी पूछा कि यदि केस साबित हो जाता है तो क्या आप चार्जशीट दाखिल कर सकते हैं, इस पर भी सीबीआई ने कोई जवाब नहीं दिया गया। पक्षों की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने भारत सरकार को दो सप्ताह जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही न्यायालय ने याचिकाकर्ता को प्रति शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डा. राजीव धवन, देवदत्त कामथ, कबीर घोष, आयुष नेगी, देवेंद्र बोहरा, रविंद्र बिष्ट, शेखर नाफटे और भारत सरकार की ओर से संजय भट्ट ने पैरवी की।